किसान पहचान पत्र
Kisan Pahchan Patra — Farmer ID Cardकिसान पहचान पत्र भारत सरकार की एक डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य देश के सभी किसानों का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है। इसे "किसानों का आधार कार्ड" भी कहा जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य कृषि सेवाओं और सब्सिडी की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करना है, ताकि ये बिना किसी बिचौलिए के सही लाभार्थियों तक पहुँचें।
मुख्य विशेषताएँ एवं डेटा बिंदु
यह कार्ड एग्रीस्टैक (डिजिटल डेटाबेस का संग्रह) से जुड़ा है:
किसान के आधार नंबर से जोड़ा गया
राज्य भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस से डिजिटल एकीकरण — स्वामित्व व प्लॉट की जांच
उगाई जा रही फसल की जानकारी — उपज अनुमान और खरीद योजना में सहायक
कृषि ऋण, बीमा (PM फसल बीमा योजना) और मिली सब्सिडी के रिकॉर्ड
किसानों को प्रमुख लाभ
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | PM-KISAN जैसी योजनाओं का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है — बिना किसी रिसाव के। |
| आसान ऋण सुविधा | बैंक तुरंत भूमि रिकॉर्ड और ऋण पात्रता की जांच कर सकते हैं — किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण मिलना आसान होता है। |
| लक्षित सलाह | सरकार मिट्टी के प्रकार और फसल के अनुसार मौसम अलर्ट और कीट नियंत्रण सलाह भेज सकती है। |
| बीमा दावे | प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल का डिजिटल रिकॉर्ड बीमा दावे की प्रक्रिया को सरल बनाता है। |
पंजीकरण प्रक्रिया
2026 में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
2026 तक, डिजिटल कृषि की दिशा में बढ़ते कदमों ने इस आईडी को कई राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए अनिवार्य बना दिया है। डेटा को केंद्रीकृत करने से सरकार आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकती है और "भूत किसान" प्रविष्टियों को कम कर सकती है।
राज्य भिन्नताएँ: हरियाणा → मेरी फसल मेरा ब्यौरा | उत्तर प्रदेश → यूपी एग्रीकल्चर पोर्टल
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana — PMFBY2026 तक भारत की प्राथमिक फसल बीमा योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) है। यह "एक राष्ट्र, एक योजना" थीम पर संचालित है। हाल ही में इसे ₹69,515 करोड़ के बढ़े हुए बजट के साथ 2025-26 तक के लिए विस्तारित किया गया है।
1. प्रीमियम दरें (किसान का हिस्सा)
सरकार अधिकांश प्रीमियम का भुगतान करती है — किसान पर बोझ बहुत कम रखा गया है:
| फसल श्रेणी | किसान का प्रीमियम (बीमित राशि का %) |
|---|---|
| खरीफ फसलें (धान, मक्का आदि) | 2.0% |
| रबी फसलें (गेहूँ, सरसों आदि) | 1.5% |
| वाणिज्यिक / बागवानी फसलें | 5.0% |
विशेष: पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश) में कई मामलों में सरकार 100% प्रीमियम सब्सिडी प्रदान करती है।
2. व्यापक जोखिम कवरेज
यह योजना पूरे फसल चक्र की सुरक्षा करती है:
प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई न हो पाने पर बीमित राशि का 25% तक दावा किया जा सकता है।
सूखा, बाढ़, भूस्खलन, कीट और बीमारियों जैसे अपरिहार्य जोखिमों से पूर्ण सुरक्षा।
ओलावृष्टि, जलभराव या भूस्खलन से अलग-थलग खेतों में हुए नुकसान पर क्षतिपूर्ति।
कटाई के 14 दिनों तक — फसल सूख रही हो और बेमौसम बारिश/चक्रवात से नष्ट हो जाए।
2026 नया ऐड-ऑन: कई राज्यों में अब जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर वैकल्पिक बीमा कवर उपलब्ध है।
3. 2026 के लिए प्रमुख तथ्य एवं अपडेट
4. आवेदन कैसे करें
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड
- किसान पहचान पत्र
- भूमि रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी)
- बुवाई प्रमाण पत्र (पटवारी/सरपंच द्वारा)
- बैंक पासबुक
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
PMDDKY — Pradhan Mantri Dhan-Dhaanya Krishi Yojanaप्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) एक ऐतिहासिक पहल है, जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी और वित्त वर्ष 2025-26 से इसे लागू किया गया।
यह Aspirational Districts Programme की तर्ज पर बनाई गई है और कृषि क्षेत्र में पिछड़े जिलों को विशेष रूप से बदलने वाली अपनी तरह की पहली योजना है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वित्तीय आवंटन | प्रति वर्ष ₹24,000 करोड़ — 6 वर्षों में कुल ₹1.44 लाख करोड़ |
| अवधि | 6 वर्ष (वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) |
| लक्षित जिले | देशभर के 100 जिले — प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक |
| लाभार्थी | लगभग 1.7 करोड़ किसान — मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसानों पर (<2 हेक्टेयर भूमि) |
| योजनाओं का एकीकरण | 11 केंद्रीय मंत्रालयों की 36 मौजूदा योजनाओं को एकत्रित कर "सिंगल-विंडो" डिलीवरी |
2. मुख्य उद्देश्य — पाँच स्तंभ
राष्ट्रीय औसत से कम उपज वाले जिलों में फसल पैदावार सुधारना।
तिलहन, दलहन और जलवायु-सहिष्णु बागवानी की ओर बदलाव को प्रोत्साहन।
पंचायत और ब्लॉक स्तर पर पोस्ट-हार्वेस्ट स्टोरेज (गोदाम और कोल्ड चेन) का निर्माण।
जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए माइक्रो-इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर) का विस्तार।
अल्पकालिक (KCC) और दीर्घकालिक कृषि ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना।
3. जिला चयन मानदंड
NITI Aayog तीन नकारात्मक संकेतकों के आधार पर जिलों का चयन करती है:
4. किसानों को प्रत्यक्ष लाभ
| श्रेणी | लाभ विवरण |
|---|---|
| इनपुट सब्सिडी | उच्च गुणवत्ता के बीज, जैव-उर्वरक और आधुनिक उपकरणों पर 50% से 80% छूट |
| अल्पकालिक ऋण | ₹50,000 से ₹1 लाख तक — रियायती ब्याज दर 4% से 7% |
| दीर्घकालिक ऋण | ₹1 लाख से ₹10 लाख तक — ट्रैक्टर या निजी भंडारण जैसे पूंजी निवेश हेतु |
| भंडारण सुविधा | गाँव स्तर पर सामुदायिक गोदामों तक पहुँच — मामूली शुल्क (₹100–₹500/माह) |
| महिला किसान | 10,000 महिला उत्पादक समूहों के लिए समर्पित सहायता — डेयरी, मुर्गीपालन या जैविक उद्यम हेतु |
5. कार्यान्वयन संरचना
2026 में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
PMDDKY "एक ही साइज सभी के लिए" की सोच को छोड़ता है। 36 योजनाओं को एक छत के नीचे लाकर और जिला-स्तरीय कस्टम प्लान बनाकर, यह भारतीय कृषि की संरचनात्मक कमजोरियों को सीधे लक्षित करता है — खासकर उन 1.7 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों के लिए जो अब तक योजनाओं के लाभ से वंचित रहे।
चयन आधार: NITI Aayog द्वारा चयनित — कम उत्पादकता + कम फसल सघनता + कमजोर ऋण प्रवाह वाले 100 जिले
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान
PM-AASHA — MSP सुरक्षा योजनाप्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) सितंबर 2018 में शुरू की गई एक व्यापक योजना है, जो दलहन, तिलहन और कोपरा उगाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने की गारंटी देती है।
2026 तक इसे 15वें वित्त आयोग चक्र (2025-26 तक) के लिए ₹35,000 करोड़ के वित्तीय आवंटन के साथ विस्तारित किया गया है।
1. PM-AASHA के प्रमुख घटक
राज्य सरकारें अपनी स्थानीय आधारभूत संरचना के अनुसार तीन में से कोई एक तंत्र चुन सकती हैं:
| घटक | कार्यप्रणाली | फोकस फसलें |
|---|---|---|
| मूल्य समर्थन योजना (PSS) | बाजार मूल्य MSP से कम होने पर केंद्रीय एजेंसियां (NAFED, FCI) फसल की भौतिक खरीद करती हैं। | दलहन, तिलहन, कोपरा |
| मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) | भौतिक खरीद नहीं होती। MSP और बाजार मूल्य का अंतर सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। | मुख्यतः तिलहन |
| निजी खरीद और भंडारण योजना (PPSS) | चुनिंदा जिलों में पायलट आधार पर निजी खिलाड़ियों की खरीद में भागीदारी। | तिलहन |
2. 2025-26 के महत्वपूर्ण अपडेट
3. प्रभाव डेटा (2018–2026)
1 करोड़ से अधिक किसानों को सीधे लाभ मिला
दलहन, तिलहन व कोपरा की लगभग 195.4 लाख मीट्रिक टन खरीद
किसानों के खातों में ₹1.07 लाख करोड़ से अधिक सीधे जमा
4. किसान कैसे लाभ उठाएँ
2026 में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
पहले MSP का लाभ मुख्यतः गेहूँ और धान उगाने वाले किसानों को मिलता था। PM-AASHA ने दलहन और तिलहन किसानों के लिए भी यही सुरक्षा जाल फैला दिया है। तूर-उड़द-मसूर की 100% खरीद गारंटी दालों की खेती को फिर से लाभदायक बना रही है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा और आयात निर्भरता घटाने के लिए अनिवार्य है।
प्रमुख एजेंसियाँ: NAFED, FCI, NCCF | खरीद पोर्टल उदाहरण: E-Uparjan (MP), मेरी फसल मेरा ब्यौरा (Haryana)
CROPIC पहल
Collection of Real-time Observations & Photographs of CropsCROPIC (Collection of Real-time Observations and Photographs of Crops) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक हाई-टेक डिजिटल पहल है।
2026 तक यह अपने पायलट चरण से निकलकर एक राष्ट्रव्यापी उपकरण बन गई है, जो PMFBY के तहत फसल बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाती है।
1. CROPIC कैसे काम करता है?
CROPIC एक AI-संचालित मोबाइल ऐप है जो किसानों को अपने खेतों का "डेटा संग्रहकर्ता" बनाता है:
2. प्रमुख डेटा एवं तथ्य (2025-2026)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पायलट चरण | खरीफ 2025 और रबी 2025-26 में 50 चयनित जिलों में शुरू |
| फंडिंग | PMFBY के तहत FIAT (Fund for Innovation and Technology) से समर्थित — आवंटन ₹825 करोड़ |
| प्रारंभिक दायरा | प्रत्येक चयनित जिले में 3 प्रमुख अधिसूचित फसलों पर केंद्रित |
| विस्तार | 2025 पायलट की सफलता के बाद 2026 में पूरे देश में सभी प्रमुख बीमाकृत फसलों के लिए लागू |
3. किसान को क्या फायदा?
CROPIC भारतीय खेती की सबसे बड़ी समस्या — बीमा दावों में देरी — को हल करता है:
सरकारी अधिकारी के भौतिक निरीक्षण का इंतजार नहीं — AI तुरंत नुकसान का आकलन करता है।
महीनों लगने वाले दावे अब 30–45 दिनों में निपटाए जा सकते हैं।
स्थानीय आपदा (जैसे ओलावृष्टि) से नुकसान पर जियोटैग्ड फोटो बीमा कंपनी के सामने अकाट्य प्रमाण है।
AI नंगी आँखों से दिखने से पहले ही "फसल तनाव" (पानी/पोषण की कमी) पकड़ लेता है।
4. अन्य योजनाओं से एकीकरण
2026 में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
CROPIC डिजिटल कृषि मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बीमा दावे की प्रक्रिया को किसान के हाथ में देता है — उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। AI + Geotagging + AgriStack का यह संयोजन PMFBY को वास्तव में "प्रौद्योगिकी आधारित" बनाता है।
फंडिंग स्रोत: FIAT (₹825 करोड़) under PMFBY | पायलट: खरीफ 2025, 50 जिले → 2026 में Pan-India विस्तार
राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम
Mission Karmayogi — National Programme for Civil Services Capacity Buildingराष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम व्यापक मिशन कर्मयोगी (सिविल सेवाओं के लिए राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम) के तहत शुरू की गई एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है। यह सरकारी कर्मचारियों की सोच को "नियम-आधारित" से "भूमिका-आधारित" और "नागरिक-केंद्रित" बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं प्रगति (2026 तक)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रशिक्षित कर्मचारी | फरवरी 2026 तक 10.5 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी प्रशिक्षित |
| प्रशिक्षक नेटवर्क | 822 Lead Trainers और 16,500+ Master Trainers की टीम तैयार |
| फेज-II | फेज-II 2026 की शुरुआत में पूर्ण — गहरे व्यवहार परिवर्तन और "सेवा भाव" पर केंद्रित |
| प्लेटफॉर्म | iGOT Karmayogi डिजिटल प्लेटफॉर्म — अब 1,600+ कोर्स उपलब्ध |
2. मूल उद्देश्य — "कर्मयोगी" दर्शन
"अधिकार" की सोच से हटकर "जन सेवक" की भावना विकसित करना।
अधिकारियों को अपने दैनिक कार्यों में व्यक्तिगत अर्थ और पेशेवर संतुष्टि खोजने के लिए प्रोत्साहन।
हर निर्णय और कार्य में आम नागरिकों के जीवन की सुगमता को सर्वोच्च प्राथमिकता।
तकनीकी कौशल से आगे — सहानुभूति, पारदर्शिता और समस्या-समाधान जैसे सॉफ्ट स्किल पर जोर।
3. कार्यान्वयन मॉडल — कैस्केड संरचना
| स्तर | प्रशिक्षण अवधि | फोकस क्षेत्र |
|---|---|---|
| Lead Trainers | 5-दिवसीय प्रशिक्षण | उच्च-स्तरीय सुविधा प्रदान करना और रणनीति निर्माण |
| Master Trainers | 3-दिवसीय प्रशिक्षण | विभाग-विशिष्ट कोचिंग |
| End Participants | 1-दिवसीय गहन कार्यशाला | नैतिकता, प्रेरणा और सेवा क्षणों पर 4 इंटरेक्टिव मॉड्यूल |
4. कृषि पर प्रभाव — ICAR केस स्टडी
नागरिकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
जब कोई सरकारी अधिकारी यह प्रशिक्षण लेता है, तो किसान/नागरिक को मिलता है: तेज अनुमोदन ("समाधान-उन्मुख" सोच), बेहतर संवाद (मंडी, बैंक, ब्लॉक कार्यालयों में सम्मानजनक व्यवहार), और जवाबदेही (अधिकारी "कर्मयोगी क्षणों" की जिम्मेदारी लेते हैं)।
प्लेटफॉर्म: iGOT Karmayogi | फेज-II: 2026 में पूर्ण | प्रशिक्षित: 10.5 लाख+ कर्मचारी
SPARK-4.0
Studentship Program for Ayurveda Research Ken — CCRAS / Ministry of AyushSPARK-4.0 (Studentship Program for Ayurveda Research Ken) आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा कार्यान्वित एक शोध-संचालित छात्रवृत्ति कार्यक्रम है। इसका लक्ष्य आयुर्वेद को "अनुभव-आधारित" से "साक्ष्य-आधारित" बनाना है।
1. प्रमुख डेटा एवं वित्तीय विवरण (2025-26)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल छात्रवृत्तियाँ | देशभर में 300 स्लॉट |
| वित्तीय अनुदान | प्रति चयनित छात्र ₹50,000 |
| भुगतान संरचना | दो किस्तों में — ₹25,000 प्रति माह |
| परियोजना अवधि | फैकल्टी-निर्देशित 2 माह का स्वतंत्र शोध |
| अब तक का लाभ | 2022 से 20+ राज्यों में 590+ छात्र लाभान्वित |
2. 2025-26 बैच की समयरेखा
3. SPARK और डिजिटल कृषि — HackIndia Spark 4
एक अलग तकनीकी पहल HackIndia Spark 4 (20-21 मार्च 2026) डिजिटल कृषि (AgriStack) से सीधे जुड़ी है — Generative AI और Open Innovation पर केंद्रित। टीमें फसल रोग पहचान और आपूर्ति श्रृंखला पारदर्शिता के AI समाधान बना रही हैं, जो CROPIC योजना को सीधे सहायता देती है।
महत्व
SPARK-4.0 आयुर्वेद के युवा शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों से प्रशिक्षित करता है। पात्रता: NCISM मान्यता प्राप्त कॉलेजों के BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा स्नातक) छात्र।
कार्यान्वयन: CCRAS, Ministry of Ayush | पात्रता: BAMS छात्र (NCISM मान्यता प्राप्त)
राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम
NPDD — White Revolution 2.0 का आधारNPDD भारत की डेयरी अवसंरचना के आधुनिकीकरण और संगठित दूध खरीद की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है। मार्च 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1,000 करोड़ अतिरिक्त जोड़े — कुल बजट अब ₹2,790 करोड़ (2021-2026 चक्र)।
1. प्रमुख घटक (2021-2026)
| घटक | फोकस क्षेत्र | प्रमुख गतिविधियाँ |
|---|---|---|
| घटक 'A' | अवसंरचना एवं गुणवत्ता | Bulk Milk Coolers, उन्नत परीक्षण लैब, नई डेयरी सहकारी समितियाँ (DCS) |
| घटक 'B' | सहकारिता के माध्यम से डेयरी | JICA (जापान) द्वारा समर्थित — UP, Bihar, Rajasthan सहित 9 राज्यों में प्रसंस्करण एवं विपणन उन्नयन |
2. 2026 लक्ष्य एवं प्रमुख डेटा
इस वित्त वर्ष 21,902 नई DCS संगठित करने की मंजूरी
3.2 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष नौकरियाँ — विशेष रूप से महिलाओं के लिए
4,500 गाँवों में 8.96 LLPD (लाख लीटर/दिन) चिलिंग क्षमता निर्माण
279 डेयरी प्लांट लैब में FTIR — दूध मिलावट की तत्काल जांच
3. वित्तीय ढाँचा
जमीनी प्रभाव (2026)
61,677 गाँव दूध परीक्षण लैब मजबूत की गईं — किसानों को वसा और SNF के आधार पर उचित भुगतान सुनिश्चित। महिलाएँ डेयरी कार्यबल का 70% और सहकारी सदस्यों का 35% हैं। NPDD अब White Revolution 2.0 के साथ जोड़ा जा रहा है — 2029 तक सहकारी दूध खरीद 1,007 लाख किग्रा/दिन तक पहुँचाने का लक्ष्य।
आवेदन: किसान सीधे आवेदन नहीं करते — राज्य सहकारी डेयरी संघ/जिला दुग्ध संघ NDDB को DPR जमा करते हैं। किसान स्थानीय DCS से जुड़ें।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन
RGM — देशी गोवंश का संरक्षण, विकास एवं दुग्ध उत्पादन वृद्धिराष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) दिसंबर 2014 में देशी गोवंश (गाय और भैंस) की नस्लों के विकास एवं संरक्षण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा डेयरी को अधिक लाभदायक बनाने के लिए शुरू किया गया। मार्च 2026 तक यह राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना के तहत वर्तमान चक्र (2021-2026) के अंतिम वर्ष में है।
1. वित्तीय आवंटन एवं अपडेट
2. प्रमुख घटक एवं किसान लाभ
| घटक | किसान को लाभ |
|---|---|
| सेक्स-सॉर्टेड वीर्य | लागत पर 50% सब्सिडी — 90% सटीकता के साथ मादा बछड़ा सुनिश्चित, भविष्य की दुग्ध आय बढ़ती है। |
| IVF तकनीक | IVF द्वारा प्रत्येक सुनिश्चित गर्भावस्था पर ₹5,000 की सब्सिडी |
| राष्ट्रव्यापी AI कार्यक्रम | 600+ जिलों में किसान के दरवाजे पर नि:शुल्क कृत्रिम गर्भाधान (AI) सेवा |
| MAITRI | गाँव स्तर पर पशु चिकित्सा सहायता देने वाले 38,000+ MAITRI तकनीशियन प्रशिक्षित |
3. 2026 तक की उपलब्धियाँ
प्रति व्यक्ति 471 ग्राम/दिन (2013-14 में 307 ग्राम था)
गिर, साहीवाल, मुर्रा जैसी देशी नस्लों के HGM साँड़ वैज्ञानिक Progeny Testing से तैयार
आधुनिक प्रजनन और जैविक संसाधन उत्पादन (बायोगैस, जैविक खाद) के एकीकृत केंद्र
2025-26 में नया — उच्च गुणवत्ता मादा बछड़ों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए + खरीद पर 3% ब्याज सब्सिडी
संरक्षित देशी नस्लें
गाय: गिर, साहीवाल, राठी, देओनी, थारपारकर, लाल सिंधी | भैंस: मुर्रा, मेहसाणा, जाफराबादी, नीली रावी, बन्नी
लाभ कैसे लें: स्थानीय पशुधन विकास बोर्ड या गाँव के MAITRI तकनीशियन से संपर्क करें। पशु आधार में पंजीकरण अनिवार्य है।
NCSI — बहु-संदर्भ पहलें
National Camel Sustainability Initiative | ICS Framework | National Career Service2026 के सरकारी परिदृश्य में NCSI तीन अलग-अलग संदर्भों में उपयोग होता है। नीचे तीनों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
1. राष्ट्रीय ऊँट स्थिरता पहल (National Camel Sustainability Initiative)
2025 के अंत में शुरू और 2026 में विस्तारित, यह भारत का पहला समर्पित राष्ट्रीय ऊँट संरक्षण कार्यक्रम है — मुख्यतः राजस्थान और गुजरात में।
भारत की ऊँट आबादी में 75% गिरावट पलटना और रायका जैसे चरवाहा समुदायों की आजीविका बचाना
बीकानेरी, जैसलमेरी और कच्छी नस्लों के संरक्षण केंद्र स्थापना
ऊँट दूध को "सुपरफूड" के रूप में बढ़ावा + "डेजर्ट टूरिज्म" अर्थव्यवस्था का समर्थन
रेगिस्तानी इलाकों के लिए विशेष मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ
2. फसल सांख्यिकी सुधार (ICS / NCSI Framework)
3. राष्ट्रीय कैरियर सेवा (National Career Service — NCS)
| विशेषता | डेटा (2026) |
|---|---|
| पोर्टल स्थिति | Digital India के तहत Mission Mode Project (MMP) |
| सक्रिय नौकरी खोजकर्ता | 3.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता |
| Model Career Centres | ऑफलाइन परामर्श के लिए 450+ केंद्र स्थापित |
| एकीकरण | e-Shram, Udyam और ASEEM पोर्टल से जुड़ा — एकीकृत "Skill-to-Job" पारिस्थितिकी तंत्र |
अन्य NCSI संदर्भ
NCSI 2026 सम्मेलन: Neurocritical Care Society of India का राष्ट्रीय सम्मेलन — सितंबर 2026, कोलकाता | Infosys NCSI: Infosys और सिंगापुर के NCSI का संयुक्त उद्यम — IT सेवाएँ, भारत के तकनीकी हब में युवाओं को रोजगार।
NCSI (Camel): MoFAHD | ICS/NCSI: NSSO + Digital Agri Mission | NCS: Ministry of Labour & Employment
राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM)
भारत पशुधन — पशुधन क्षेत्र की डिजिटल रीढ़मार्च 2026 तक NDLM भारत के पशुधन क्षेत्र की "डिजिटल रीढ़" बन चुका है। यह 53 करोड़ से अधिक पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और उत्पादकता को ट्रैक करने वाला एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है।
1. प्रमुख आँकड़े (मार्च 2026)
35.96 करोड़ पशुओं को 12-अंकीय UID से टैग किया गया
9.5 करोड़ पशुपालक डिजिटल डेटाबेस में
146.6 करोड़ से अधिक प्रविष्टियाँ — बीमारी प्रकोप ट्रैकिंग के लिए
प्रजनन और स्वास्थ्य घटनाओं सहित 250 करोड़ से अधिक डिजिटल रिकॉर्ड
फील्ड फोर्स: MAITRI और पशु चिकित्सकों को रियल-टाइम डेटा एंट्री के लिए 4 लाख यूजर ID जारी
2. मिशन के चार प्रमुख स्तंभ
| स्तंभ | कार्यप्रणाली |
|---|---|
| पशु पहचान | हर पशु को 12-अंकीय बारकोड वाला पीला ईयर टैग — "पशु आधार" की तरह काम करता है, व्यापार और बीमा में धोखाधड़ी रोकता है। |
| रोग निगरानी | एक गाँव में Lumpy Skin या FMD रिपोर्ट होते ही सिस्टम पड़ोसी जिलों को तुरंत रिंग वैक्सीनेशन के लिए अलर्ट करता है। |
| ट्रेसेबिलिटी | EU/USA को दूध-मांस निर्यात के लिए पशु के जन्म से बाजार तक की डिजिटल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र उपलब्ध। |
| वित्तीय समावेश | दूध उत्पादन और टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड क्रेडिट स्कोर की तरह काम करता है — डेयरी किसानों को बैंक ऋण मिलना आसान। |
3. 2026 में किसान लाभ
वैकल्पिक अर्थ: राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन (DISHA)
NDLM का एक अन्य अर्थ है National Digital Literacy Mission (DISHA) — फरवरी 2026 तक 5 करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षर बनाने का मील का पत्थर पार किया। लक्ष्य: हर घर में कम से कम एक सदस्य सरकारी सेवाओं के लिए कंप्यूटर/स्मार्टफोन उपयोग कर सके। 2026 बजट: डिजिटल विभाजन कम करने के लिए ₹1.39 लाख करोड़ शिक्षा आवंटन का हिस्सा।
NDLM (पशुधन): MoFAHD — भारत पशुधन प्लेटफॉर्म | NDLM (साक्षरता): DISHA — Ministry of Electronics & IT
डायमंड इम्प्रेस्ट ऑथराइज़ेशन (DIA) योजना
FTP 2023 — हीरा निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की व्यापार सुविधा पहलDIA योजना विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023 के तहत भारत सरकार द्वारा पुन: प्रस्तुत एक महत्वपूर्ण व्यापार सुविधा उपाय है। अप्रैल 1, 2025 से पूर्णतः चालू यह योजना भारतीय हीरा निर्यातकों को बोत्सवाना और नामीबिया जैसे खनन देशों के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखती है।
1. प्रमुख विशेषताएँ
2. पात्रता मानदंड (2026)
| मानदंड | आवश्यकता |
|---|---|
| निर्यात स्थिति | Two Star Export House या उससे ऊपर का दर्जा |
| निर्यात प्रदर्शन | पिछले 3 वित्त वर्षों में कट एवं पॉलिश हीरों का न्यूनतम वार्षिक निर्यात USD 15 मिलियन |
| आयात सीमा | पिछले 3 वर्षों के औसत वार्षिक निर्यात का 5% तक — अधिकतम USD 15 मिलियन |
| बहिष्करण | Lab-Grown Diamonds (LGDs) इस योजना से पूरी तरह बाहर |
3. वित्तीय लाभ एवं कर छूट (दिसंबर 2025 अपडेट)
BCD, Additional Customs Duty, Education Cess, Anti-dumping Duty, Countervailing Duty — सभी से मुक्ति
DIA आयात पर IGST और Compensation Cess भी माफ — MSME के लिए कार्यशील पूँजी का बोझ कम
रणनीतिक महत्व
पूँजी पलायन रोकना: भारतीय हीरा इकाइयों को खनन देशों में जाने से रोकना। रोजगार सृजन: अर्ध-तैयार हीरा प्रसंस्करण में कारीगरों की नौकरियाँ बचाना और बनाना। MSME सहायता: कच्चे माल की लागत घटाकर छोटे निर्यातकों को वैश्विक दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा का अवसर।
आवेदन: ANF-4J फॉर्म — DGFT पोर्टल पर डिजिटल सिग्नेचर से ऑनलाइन | Bond/PBG: सीमा शुल्क प्राधिकरण के साथ Performance Bank Guarantee अनिवार्य
CHES विस्तार योजना 2025-26
Central Horticultural Experiment Station — ICAR-CIAH | MIDH2026 में CHES विस्तार योजना मुख्यतः केंद्रीय बागवानी प्रयोग स्टेशन (CHES) के अवसंरचना और तकनीकी विस्तार को दर्शाती है — यह ICAR-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH) की क्षेत्रीय शाखा है। यह बागवानी एकीकृत विकास मिशन (MIDH) का हिस्सा है और प्रयोगशाला-परीक्षित तकनीकों को किसान समूहों तक पहुँचाती है।
1. 2025-26 विस्तार के मुख्य उद्देश्य
अनुसंधान भूखंडों से किसानों के खेतों में क्लस्टर-आधारित विकास की ओर बदलाव।
किसानों को कम मूल्य के अनाज से उच्च मूल्य के बागवानी फसलों (फल व सब्जियाँ) की ओर प्रोत्साहित करना।
विस्तार बजट का बड़ा हिस्सा जनजातीय उप-योजना (TSP) के माध्यम से।
2. प्रमुख घटक एवं सब्सिडी (2026)
| घटक | सब्सिडी/सहायता | लक्षित फसलें |
|---|---|---|
| हाइब्रिड बीज वितरण | इकाई लागत का 40% (अधिकतम ₹20,000/हेक्टेयर) | टमाटर, भिंडी, बैंगन |
| नए बाग की स्थापना | रोपण सामग्री पर 50% सब्सिडी | अनार (भगवा), अमरूद, शरीफा |
| संरक्षित खेती | सब्सिडाइज्ड पॉलीहाउस और नेटहाउस | शिमला मिर्च, फूल, पौध |
| नर्सरी रेटिंग | निजी नर्सरी प्रमाणन — "रोग-मुक्त" पौधे सुनिश्चित | सभी बागवानी पौधे |
3. 2026 के हालिया मील के पत्थर
किसान भागीदारी कैसे करें?
1) एक ब्लॉक के किसान समूह/FPO बनाएँ। 2) राज्य बागवानी विभाग या I-Khedut / Mera Byora पोर्टल से आवेदन करें। 3) CHES वैज्ञानिक/जिला बागवानी अधिकारी साइट निरीक्षण करेंगे। 4) CHES नर्सरी से सब्सिडी दर पर उच्च गुणवत्ता रोपण सामग्री मिलेगी।
वैकल्पिक अर्थ: Chess Expansion Scheme (National School Chess League) — मार्च 2026, शतरंज चैंपियन Gukesh D के सहयोग से — स्कूलों में शून्य लागत पर शतरंज शिक्षा।
CGSS — स्टार्टअप ऋण गारंटी योजना (विस्तार 2025-26)
Credit Guarantee Scheme for Startups — DPIIT | Viksit Bharat 2047CGSS (Credit Guarantee Scheme for Startups) का 2025-26 में भारी विस्तार हुआ है। संशोधित ढाँचे में गारंटी सीमा दोगुनी और शुल्क आधा कर दिया गया है, जिससे उद्यमियों के लिए प्रवेश बाधाएँ कम हुई हैं।
1. प्रमुख वित्तीय विस्तार (2025-26)
| विशेषता | पुरानी सीमा (2025 से पहले) | विस्तारित सीमा (2026) |
|---|---|---|
| अधिकतम गारंटी कवर | ₹10 करोड़ | ₹20 करोड़ प्रति उधारकर्ता |
| गारंटी शुल्क (Champion Sectors) | 2.0% प्रति वर्ष | 1.0% प्रति वर्ष (आधा) |
| कवरेज (≤₹10 Cr ऋण) | ~75-80% | डिफॉल्ट राशि का 85% |
| कवरेज (>₹10 Cr ऋण) | N/A | डिफॉल्ट राशि का 75% |
2. 27 Champion Sectors
Make in India पहल के तहत 27 क्षेत्रों को लक्षित — इनमें स्टार्टअप को रियायती 1% गारंटी शुल्क मिलता है:
इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल
AI, Space-tech, FinTech, Agri-tech
पर्यटन, IT-enabled services, स्वास्थ्य सेवा
3. दोहरे गारंटी मॉडल
विकसित भारत 2047 पर प्रभाव
Union Budget 2026-27 में CGSS विस्तार के पूरक के रूप में Fund of Funds for Startups में ₹10,000 करोड़ अतिरिक्त डाले गए। इससे स्टार्टअप को बिना संपत्ति/सोना गिरवी रखे Equity (Fund) और Debt (CGSS) दोनों मिलते हैं।
पात्रता: DPIIT मान्यता प्राप्त + NPA नहीं + Scheduled Commercial Bank / RBI-NBFC (₹100cr+ net worth) / SEBI-AIF से ऋण
MSME निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM)
निर्यात प्रोत्साहन — ₹7,295 करोड़ | NIRYAT PROTSAHAN + NIRYAT DISHA2026 की शुरुआत में भारत सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के तहत MSME निर्यात बढ़ाने के लिए दो प्रमुख वित्तीय हस्तक्षेप शुरू किए। नवंबर 2025 में कैबिनेट से मंजूरी के बाद जनवरी 2026 से पूर्णतः चालू। संयुक्त बजट: ₹7,295 करोड़।
1. निर्यात ऋण पर ब्याज सहायता
2. निर्यात ऋण के लिए संपार्श्विक सहायता
3. EPM का रणनीतिक ढाँचा
| उप-योजना | फोकस क्षेत्र | प्रमुख उपकरण |
|---|---|---|
| NIRYAT PROTSAHAN | वित्तीय सहायक | ब्याज सब्सिडी, संपार्श्विक गारंटी, निर्यात फैक्टरिंग, ई-कॉमर्स ऋण |
| NIRYAT DISHA | गैर-वित्तीय सहायक | बाजार पहुँच, ब्रांडिंग, अंतर्राष्ट्रीय पैकेजिंग मानक, व्यापार इंटेलिजेंस |
2026 में यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ये योजनाएँ MSME की दो सबसे बड़ी बाधाओं — पूँजी की ऊँची लागत और संपार्श्विक की कमी — को दूर करके भारत के $1 ट्रिलियन निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती हैं। जनवरी 2026 तक 3,000 से अधिक निर्यातकों ने ब्याज सब्सिडी के लिए पंजीकरण कराया — जो उच्च माँग का संकेत है।
कुल EPM बजट: ₹25,060 करोड़ (2031 तक) | पहला बैच: जनवरी 2026 से 3,000+ निर्यातक पंजीकृत
निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM)
DGFT | ₹25,060 करोड़ (2025-31) | $1 ट्रिलियन माल निर्यात लक्ष्य 2030EPM भारत सरकार की प्रमुख फ्लैगशिप निर्यात योजना है — 2025 के अंत में स्वीकृत और FY 2025-26 से पूर्णतः चालू। यह पुरानी खंडित योजनाओं (IES, MAI) को एकीकृत कर DGFT के डिजिटल नेतृत्व में भारतीय MSMEs को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करती है।
1. मुख्य आँकड़े और बजट
6 वर्ष (FY 2025-26 से 2030-31) के लिए ₹25,060 करोड़
IES (Interest Equalisation Scheme) और MAI (Market Access Initiative) — दोनों को EPM में विलय
2030 तक भारत का $1 ट्रिलियन माल निर्यात हासिल करना
31 मार्च 2026 तक के ऋणों पर 450 दिन की अनुमत ऋण अवधि
2. NIRYAT PROTSAHAN — वित्तीय सहायक
| उपकरण | विवरण |
|---|---|
| ब्याज सहायता | Pre-shipment + Post-shipment रुपया ऋण पर 2.75% प्रति वर्ष सब्सिडी; सीमा: ₹50 लाख/IEC/वर्ष |
| संपार्श्विक (CGTMSE) | Micro/Small के लिए 85%, Medium के लिए 65% गारंटी — अधिकतम ₹10 Cr/निर्यातक/वर्ष |
| ई-कॉमर्स डायरेक्ट क्रेडिट | ऑनलाइन निर्यातकों के लिए ₹50 लाख तक — 90% गारंटी कवर (फरवरी 2026 से) |
| ई-कॉमर्स इन्वेंटरी क्रेडिट | विदेशी गोदामों में माल भंडारण के लिए ₹5 करोड़ तक (फरवरी 2026 से) |
3. NIRYAT DISHA — गैर-वित्तीय सहायक (Export Readiness)
| घटक | उद्देश्य | लाभ |
|---|---|---|
| TRACE (अनुपालन) | अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण एवं प्रमाणन लागत रिम्बर्सेमेंट | लागत का 60–75% वापसी — अधिकतम ₹25 लाख/वर्ष |
| FLOW (लॉजिस्टिक्स) | विदेशी गोदाम और पूर्ति केंद्रों तक पहुँच | परियोजना लागत का 30% तक अनुदान |
| MAS (बाजार पहुँच) | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों और B2B बैठकों में भागीदारी | ₹5 Cr/event तक सहायता |
4. प्राथमिकता क्षेत्र — Positive List (~75% निर्यात लाइनें)
6-digit स्तर पर cotton yarn — श्रम-गहन रोजगार संरक्षण की विशेष प्राथमिकता
पारंपरिक कारीगरों के लिए लक्षित वैश्विक बाजार पहुँच
EU/US स्वास्थ्य-सुरक्षा मानकों की पूर्ति में सहायता
मार्च 2026 की स्थिति और आवेदन प्रक्रिया
पहले 2 महीनों में 3,000+ निर्यातक पंजीकृत; DGFT पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल — processing time में 40% कमी। आवेदन: सक्रिय IEC के साथ DGFT Official Portal → Export Promotion Mission Dashboard पर जाएँ — Protsahan और Disha दोनों के लिए पात्रता ट्रैक करें एवं ऑनलाइन आवेदन करें।
पुरानी योजनाएँ: IES और MAI अब EPM में समाहित | डिजिटल पारदर्शिता: सभी आवेदन और फंड वितरण DGFT पोर्टल से एकीकृत
PM-YUVA 3.0 (Young, Upcoming and Versatile Authors)
प्रधानमंत्री युवा लेखक मेंटरशिप — तीसरा संस्करण | NBT | मार्च 2026PM-YUVA 3.0 युवा लेखकों के मेंटरशिप के लिए प्रधानमंत्री योजना का तीसरा संस्करण है। 11 मार्च 2025 को शुरू यह योजना मार्च 2026 में अपने अंतिम पांडुलिपि-लेखन चरण में है। उद्देश्य: 30 वर्ष से कम आयु के लेखकों को भारतीय साहित्य और विश्वदृष्टि के वैश्विक राजदूत बनाना।
1. PM-YUVA 3.0 के तीन थीम
| थीम | चयनित लेखक | फोकस क्षेत्र |
|---|---|---|
| भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) | 20 | प्राचीन ज्ञान, वेद, योग, आयुर्वेद, पारंपरिक विज्ञान |
| आधुनिक भारत के निर्माता (1950-2025) | 20 | स्वातंत्र्योत्तर विज्ञान, अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुधार, शासन के दूरदर्शी |
| भारतीय प्रवासियों का योगदान | 10 | राष्ट्र-निर्माण और वैश्विक कूटनीति में विदेश में बसे भारतीयों की भूमिका |
2. वित्तीय और व्यावसायिक लाभ
₹50,000/माह × 6 माह = कुल ₹3 लाख
NBT द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की बिक्री पर 10% रॉयल्टी — जीवन भर
National Book Trust (NBT) प्रकाशन + 22 आधिकारिक भाषाओं में अनुवाद — Ek Bharat Shreshtha Bharat
अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेलों और साहित्य महोत्सवों में मंच
3. 2025-26 की समयरेखा (मार्च 2026 की स्थिति)
पात्रता मानदंड (भविष्य के संस्करणों के लिए)
आयु: 11 मार्च 2025 को ठीक 30 वर्ष या उससे कम। विधा: केवल गैर-कल्पना (Non-Fiction)। आवेदन: MyGov पोर्टल पर 10,000 शब्दों का पुस्तक प्रस्ताव (सारांश + नमूना अध्याय)। बहिष्करण: PM-YUVA 1.0 या 2.0 के लेखक 3.0 के लिए अपात्र।
YUVA 1.0: Unsung Heroes | YUVA 2.0: Democracy | YUVA 3.0: IKS + आधुनिक भारत + प्रवासी भारतीय
MERITE योजना
Multidisciplinary Education and Research Improvement in Technical Education | NEP 2020 | World Bank सहायताMERITE एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जो अगस्त 2025 में स्वीकृत हुई और 2025-26 से प्रथम वर्ष में लागू है। यह NEP 2020 के अनुरूप भारत की तकनीकी शिक्षा को अनुसंधान, नवाचार और रोजगार-योग्यता की दिशा में बदलने के लिए बनाई गई है। इसकी आधी फंडिंग विश्व बैंक ऋण से आती है।
1. वित्तीय संरचना
5 वर्ष (2025-26 से 2029-30) के लिए ₹4,200 करोड़
50% फंडिंग (₹2,100 करोड़) विश्व बैंक ऋण — वैश्विक मानकों की पुष्टि
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — केंद्रीय क्षेत्र योजना (राज्य योगदान नहीं)
275 संस्थान (175 इंजीनियरिंग + 100 पॉलिटेक्निक) — लगभग 7.5 लाख छात्र
2. लक्षित संस्थान (2026 डेटा)
| श्रेणी | संस्थानों की संख्या |
|---|---|
| इंजीनियरिंग संस्थान (चयनित NITs एवं राज्य महाविद्यालय) | 175 |
| पॉलिटेक्निक संस्थान | 100 |
| कुल संस्थान | 275 |
| लाभान्वित छात्र | लगभग 7.5 लाख |
3. मुख्य उद्देश्य और हस्तक्षेप
Hub & Spoke मॉडल — 2026 में MERITE क्यों महत्वपूर्ण?
MERITE के Hub and Spoke मॉडल में एक 'Hub' (जैसे NIT) की उन्नत अनुसंधान सुविधाएँ कई 'Spoke' संस्थाओं (स्थानीय पॉलिटेक्निक) के साथ साझा की जाती हैं — महंगे लैब उपकरणों का अधिकतम उपयोग। यह IIT जैसी सुविधाओं तक का "democratization" है।
मेंटर: IITs और IIMs | नियामक: AICTE और NBA | स्वीकृति: अगस्त 2025 | लागू: 2025-26 से प्रथम वर्ष
PM SHRI (PM ScHools for Rising India)
केंद्र प्रायोजित योजना | सितंबर 2022 | ₹27,360 करोड़ (5 वर्ष) | NEP 2020 अनुकरणीय विद्यालयPM SHRI एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो सितंबर 2022 में शुरू हुई। इसका लक्ष्य भारत भर के 14,500 से अधिक विद्यालयों को उन्नत "अनुकरणीय" विद्यालयों में बदलना है जो NEP 2020 को लागू करने का आदर्श प्रस्तुत करें। मार्च 2026 में यह अपने 5-वर्षीय चक्र (2022-23 से 2026-27) के अंतिम वर्ष में है।
1. मुख्य आँकड़े और वित्त (2025-26)
5 वर्षों में ₹27,360 करोड़ — 2025-26 में ₹7,500 करोड़ आवंटन (67% वृद्धि)
2026 तक 13,076 विद्यालय चयनित; 2026-27 अंत तक लक्ष्य: 14,500+
20 लाख से अधिक छात्र सीधे लाभान्वित
AI-संचालित व्यक्तिगत शिक्षा और 21वीं सदी के वोकेशनल लैब — Saturation Phase
2. फंडिंग पैटर्न
| श्रेणी | अनुपात (केंद्र:राज्य) |
|---|---|
| सामान्य राज्य और विधायिका वाले UT | 60:40 |
| पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्य और J&K | 90:10 |
| विधायिका रहित UTs | 100% केंद्रीय |
3. PM SHRI विद्यालयों की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| पाठ्यक्रम | रटने से हटकर दक्षता-आधारित, अनुभवात्मक और खोज-आधारित शिक्षाशास्त्र |
| अवसंरचना | Smart Classrooms, ICT Labs, एकीकृत Science Labs, Atal Tinkering Labs |
| हरित पहल | Solar Panels, LED Lighting, Nutrition Garden, जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन |
| मेंटरशिप | हर PM SHRI विद्यालय क्षेत्र के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए मार्गदर्शक केंद्र |
| मूल्यांकन | Holistic Progress Card (HPC) — 360-डिग्री छात्र विकास पर केंद्रित |
4. चयन प्रक्रिया — "चैलेंज मोड"
राज्य-वार प्रगति (2026) और वर्तमान समाचार
पश्चिम बंगाल और दिल्ली ने प्रारंभ में बाहर रहने का विकल्प चुना था। Union Budget 2026-27 में शिक्षा के लिए ₹1.39 लाख करोड़ — "Yuva Shakti" फोकस। PM SHRI के लिए अब AI-संचालित व्यक्तिगत शिक्षा उपकरणों की Saturation पर ध्यान।
UP: 1,710 (सर्वाधिक) | AP: 935 | महाराष्ट्र: 827 | KVS: 869 | NVS: 620
SITAA — Scheme for Innovation and Technology Association with Aadhaar
UIDAI | MeitY Startup Hub + NASSCOM | डीपफेक और बायोमेट्रिक धोखाधड़ी रोधी | अक्टूबर 2025मार्च 2026 में SITAA का अर्थ है Scheme for Innovation and Technology Association with Aadhaar — UIDAI द्वारा शुरू की गई एक बड़ी पहल। यह बंद सरकारी तंत्र से Open Innovation Model की ओर बदलाव है — स्टार्टअप और शिक्षा जगत के साथ मिलकर डीपफेक और बायोमेट्रिक धोखाधड़ी के खिलाफ भारत की आधार अवसंरचना को भविष्य-सुरक्षित बनाना।
1. मुख्य उद्देश्य और वित्त
स्केलेबल समाधान विकसित करने के लिए ₹2.5 करोड़ तक
गहन शोध परियोजनाओं और डेटासेट के लिए ₹5 करोड़ तक
MeitY Startup Hub (MSH) और NASSCOM — मेंटरशिप और उद्योग कनेक्शन
सभी नवाचार Aadhaar Act और वैश्विक डेटा संरक्षण मानकों के अनुपालन में
2. तीन मुख्य चुनौतियाँ (पायलट चरण)
| चुनौती | फोकस क्षेत्र | लक्ष्य |
|---|---|---|
| Face Liveness Detection | Anti-Spoofing | SDK जो प्रमाणीकरण के दौरान असली चेहरे और Photo/Video/Mask/Deepfake में अंतर कर सके |
| Presentation Attack Detection (PAD) | AI/ML अनुसंधान | विभिन्न उपकरणों पर रियल-टाइम में हेरफेर किए गए बायोमेट्रिक इनपुट पहचानने के लिए रोबस्ट डेटासेट और मॉडल |
| Contactless Fingerprint | टचलेस बायोमेट्रिक्स | सामान्य स्मार्टफोन कैमरों से उच्च-गुणवत्ता फिंगरप्रिंट — भौतिक स्कैनर की आवश्यकता समाप्त |
3. SITAA की समयरेखा (2025-26)
डिजिटल इंडिया के लिए महत्व — Open Innovation की ओर
आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन देकर विदेशी बायोमेट्रिक proprietary software पर निर्भरता कम। Scalability: समाधान 1.4 अरब से अधिक निवासियों और कम लागत के उपकरणों पर काम करने योग्य होने चाहिए। Privacy: Aadhaar Act और वैश्विक डेटा संरक्षण मानकों का पूर्ण अनुपालन।
लॉन्च: अक्टूबर 2025 | एजेंसी: UIDAI | भागीदार: MeitY Startup Hub (MSH) + NASSCOM
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
Micro Units Development & Refinance Agency | 2015 | Tarun Plus 2026 अपडेट2015 में शुरू PMMY ने 2026 में एक नया मील का पत्थर छुआ है। Union Budget 2026-27 में Tarun Plus श्रेणी को पूरी तरह चालू किया गया — अधिकतम ऋण सीमा दोगुनी कर ₹20 लाख कर दी गई। अब तक 54 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत हो चुके हैं।
1. चार ऋण श्रेणियाँ (2026)
| श्रेणी | ऋण राशि | लक्षित समूह |
|---|---|---|
| शिशु | ₹50,000 तक | नए स्टार्टअप और सूक्ष्म उद्यमी (स्ट्रीट वेंडर, छोटी दुकानें) |
| किशोर | ₹50,001 – ₹5 लाख | स्थापित इकाइयाँ — कार्यशील पूँजी या छोटे उपकरण |
| तरुण | ₹5 लाख – ₹10 लाख | महत्वपूर्ण विस्तार और अवसंरचना के लिए तैयार इकाइयाँ |
| तरुण Plus 🆕 | ₹10 लाख – ₹20 लाख | तरुण ऋण सफलतापूर्वक चुकाने वाले उद्यमी |
2. मुख्य प्रदर्शन डेटा (मार्च 2026)
योजना शुरू से अब तक 54 करोड़ से अधिक ऋण
कुल वितरण ₹35 लाख करोड़ से अधिक
68–70% MUDRA खाते महिला उद्यमियों के पास
SC/ST और OBC लाभार्थी 51% से अधिक | NPA 3.4% (4.7% से कम)
3. प्रमुख विशेषताएँ
4. पात्र क्षेत्र
खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, छोटी इकाइयाँ
दुकानदार, थोक विक्रेता, फल-सब्जी विक्रेता
ब्यूटीशियन, धोबी, मरम्मत दुकान, ट्रांसपोर्टर
डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन (फसल ऋण नहीं)
2026 में आवेदन कैसे करें?
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल: Udyamimitra Portal — कई बैंकों को एक साथ आवेदन ट्रैक करें। Jan Samarth Portal — Pashu Aadhaar और e-Shram से एकीकृत — ग्रामीण और असंगठित श्रमिकों का तेज़ सत्यापन।
दस्तावेज (₹2 लाख तक): आधार, PAN, व्यवसाय पते का प्रमाण | ₹2 लाख से ऊपर: अंतिम 2 वर्षों का Balance Sheet + ITR (यदि उपलब्ध)
भारतीय भाषा पुस्तक योजना (BBPS)
Union Budget 2025-26 | UGC + NCERT + भारतीय भाषा समिति | Project ASMITA | NEP 2020BBPS एक ऐतिहासिक पहल है जो Union Budget 2025-26 में पेश हुई और मार्च 2026 में सक्रिय कार्यान्वयन में है। यह उच्च और तकनीकी शिक्षा की सामग्री को 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में डिजिटलाइज़ और अनुवाद करती है — NEP 2020 की भाषाई समानता के वादे को पूरा करती है।
1. मुख्य आँकड़े और लक्ष्य (2025-26)
| विशेषता | लक्ष्य / डेटा |
|---|---|
| कुल पुस्तक लक्ष्य (ASMITA) | 5 वर्षों में 22,000 पुस्तकें (प्रति भाषा 1,000) |
| तत्काल मील का पत्थर | जून 2025 तक Arts, Science, Commerce में 1,800 पाठ्यपुस्तकें (पूर्ण) |
| नोडल विश्वविद्यालय | 13 अग्रणी विश्वविद्यालय — क्षेत्रीय भाषा सामग्री की अगुवाई के लिए |
| IKS बजट लिंक | भारतीय ज्ञान प्रणाली बजट ₹50 करोड़ तक बढ़ाया |
| भाषाएँ | भारतीय संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाएँ |
2. तीन प्रमुख उप-परियोजनाएँ
3. डिजिटल वितरण और AI एकीकरण (2026)
Anuvadini ऐप — voice-assisted learning और जटिल तकनीकी पांडुलिपियों का अनुवाद
DIKSHA (स्कूल), e-PG Pathshala (PG), NDLI — मुफ्त या सब्सिडाइज्ड दरों पर
2026 के अंत तक सभी ग्रामीण सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में high-speed internet
4. उच्च और तकनीकी शिक्षा पर प्रभाव
कार्यान्वयन स्थिति (मार्च 2026)
Demand-Driven Model: पाठ्यपुस्तकें छात्रों की माँग के आधार पर प्राथमिकता दी जाती हैं — जैसे NIT मणिपुर के छात्र मणिपुरी में पाठ्यपुस्तक माँगें, तो सिस्टम अनुवाद/निर्माण चक्र शुरू करता है। 2025-26 शैक्षणिक सत्र पहला है जहाँ 175+ संस्थानों के छात्र इन डिजिटल पाठ्यपुस्तकों को प्राथमिक अध्ययन सामग्री के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
नोडल एजेंसी: UGC + NCERT + भारतीय भाषा समिति | AI ऐप: Anuvadini | डिजिटल प्लेटफॉर्म: DIKSHA / e-PG Pathshala / NDLI
अटल पेंशन योजना (APY)
PFRDA | असंगठित क्षेत्र के लिए गारंटीड पेंशन | 2030-31 तक जारीAPY असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को गारंटीकृत मासिक पेंशन देने वाली भारत की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है। जनवरी 2026 में Union Cabinet ने APY को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी। मार्च 2026 में कुल 8.66 करोड़ सदस्य और ₹46,000 करोड़ से अधिक का कोष।
1. मुख्य आँकड़े (मार्च 2026)
8.66 करोड़ (86.6 मिलियन) सदस्य
APY के तहत प्रबंधित कोष ₹46,000 करोड़ से अधिक
हालिया वित्त वर्ष में नए सदस्यों में 48–55% महिलाएँ
2. पेंशन स्लैब और लाभ
| मासिक पेंशन | न्यूनतम योगदान (18 वर्ष) | अधिकतम योगदान (40 वर्ष) |
|---|---|---|
| ₹1,000 | ₹42 | ₹291 |
| ₹2,000 | ₹84 | ₹582 |
| ₹3,000 | ₹126 | ₹873 |
| ₹4,000 | ₹168 | ₹1,164 |
| ₹5,000 | ₹210 | ₹1,454 |
3. Triple Benefit गारंटी
4. निकासी और निकास नीति
| स्थिति | नियम |
|---|---|
| 60 वर्ष पूरे होने पर | 100% Annuitization — मासिक पेंशन स्वतः शुरू |
| 60 वर्ष से पहले मृत्यु | जीवनसाथी शेष अवधि तक खाता जारी रख सकते हैं या संचित कोष निकाल सकते हैं |
| स्वैच्छिक निकास | केवल अपना योगदान + शुद्ध अर्जित ब्याज (खाता रखरखाव शुल्क घटाकर) |
2026 के हालिया अपडेट
2030-31 तक विस्तार: ग्रामीण क्षेत्रों में Saturation सुनिश्चित करने के लिए प्रचार गतिविधियों का समर्थन। डिजिटल एकीकरण: APY Mobile App या NSDL पोर्टल पर योगदान ट्रैक करें और e-PRAN कार्ड डाउनलोड करें।
पात्रता: 18–40 वर्ष | सक्रिय बचत खाता | आयकर दाता APY के लिए अपात्र (अक्टूबर 2022 से प्रभावी)
CGSE — निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना
Credit Guarantee Scheme for Exporters | 1 दिसंबर 2025 | Jan Samarth Portal | ₹20,000 करोड़मार्च 2026 में CGSE (Credit Guarantee Scheme for Exporters) भारतीय निर्यात क्षेत्र को 100% तरलता सहायता प्रदान करने की एक उच्च-प्रभाव पहल है। 2025 के अंत में स्वीकृत और 1 दिसंबर 2025 से Jan Samarth Portal पर चालू — MSME और गैर-MSME दोनों निर्यातकों के लिए।
1. मुख्य आँकड़े और वित्त (2026)
₹20,000 करोड़
100% — सरकार पूरी अतिरिक्त ऋण राशि की गारंटी लेती है
31 मार्च 2026 तक या ₹20,000 करोड़ की सीमा भरने तक
पहले महीने में ही ₹8,500 करोड़ के आवेदन; ₹3,100 करोड़ से अधिक स्वीकृत
2. पात्रता मानदंड
| निर्यातक श्रेणी | पात्रता | सहायता सीमा |
|---|---|---|
| प्रत्यक्ष निर्यातक (MSME) | वार्षिक टर्नओवर का न्यूनतम 5% निर्यात | मौजूदा निर्यात WC सीमा का 20% तक |
| प्रत्यक्ष निर्यातक (Non-MSME) | वार्षिक टर्नओवर का न्यूनतम 20% निर्यात | मौजूदा निर्यात WC सीमा का 20% तक |
| अप्रत्यक्ष निर्यातक (केवल MSME) | टर्नओवर का ≥30% पात्र प्रत्यक्ष निर्यातकों को आपूर्ति | मौजूदा घरेलू WC सीमा का 20% तक |
खाता स्थिति: 30 सितंबर 2025 को उधारकर्ता का खाता "Standard" होना चाहिए — NPA नहीं और 60 दिन से अधिक अतिदेय नहीं।
3. प्रमुख विशेषताएँ और लाभ
2026 में रणनीतिक प्रभाव और आवेदन
रोजगार सुरक्षा: निर्यात क्षेत्र में 4.5 करोड़ से अधिक लोग — CGSE व्यापार निरंतरता सुनिश्चित करती है। बाजार विविधीकरण: अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, SE Asia में नए बाजार।
आवेदन: Jan Samarth Portal → मोबाइल से रजिस्टर → IEC + Udyam Registration लिंक → CGSE चुनें → बैंक (MLI) को स्वतः अग्रेषित।
CGSE vs CGSS: CGSE = निर्यातकों के लिए (100% गारंटी) | CGSS = स्टार्टअप के लिए (85% गारंटी, ₹20Cr सीमा)
SPMEPCI — भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कार विनिर्माण प्रोत्साहन योजना
Ministry of Heavy Industries | Tesla / BMW | 15% आयात शुल्क | ₹4,150 Cr अनिवार्य निवेशSPMEPCI एक विशेष नीति है जो वैश्विक EV दिग्गजों (Tesla, BMW) को भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने हेतु बनाई गई। मार्च 2026 में यह योजना समीक्षा चरण में है — आवेदन पोर्टल के खुले रहने के बावजूद कोई आवेदन नहीं मिला, और India-EU FTA के कारण पुनर्गठन की आवश्यकता है।
1. मुख्य आँकड़े और वित्त (2026)
₹4,150 करोड़ (लगभग USD 500 मिलियन)
प्रति वर्ष 8,000 EVs तक 15% शुल्क (सामान्य 70-100% के बजाय)
केवल USD 35,000 से अधिक CIF मूल्य की EVs रियायती शुल्क के लिए पात्र
₹6,484 करोड़ या निवेश प्रतिबद्धता — जो भी कम हो
2. घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) मील के पत्थर
| मील का पत्थर | न्यूनतम DVA |
|---|---|
| वर्ष 3 के अंत | 25% (स्थानीय असेंबली/पुर्जे) |
| वर्ष 5 के अंत | 50% (पूर्ण पैमाने पर विनिर्माण/बैटरी) |
फरवरी 2026 राज्यसभा रिपोर्ट: अक्टूबर 2025 तक पोर्टल खुला रहने के बावजूद कोई औपचारिक आवेदन नहीं मिला — न्यूनतम निवेश सीमा कम करने या India-EU FTA के साथ संरेखित करने पर विचार।
3. पात्र निवेश मदें
"Carrot and Stick" नीति — रणनीतिक महत्व
गाजर (Carrot): 5 वर्षों के लिए 15% आयात शुल्क — Luxury EVs के साथ भारतीय बाजार का परीक्षण। डंडा (Stick): ₹4,150 करोड़ अनिवार्य निवेश + बचाए गए शुल्क के बराबर Bank Guarantee — वर्ष 5 तक 50% DVA नहीं होने पर सरकार Guarantee भुनाएगी।
मार्च 2026 स्थिति: कोई आवेदन नहीं मिला — India-EU FTA के मद्देनज़र योजना पुनर्गठन पर विचाराधीन
PM E-DRIVE योजना
Prime Minister Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement | FAME-II का उत्तराधिकारीPM E-DRIVE (Prime Minister Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए भारत सरकार की प्राथमिक केंद्रीय पहल है, जिसने पूर्व FAME-II कार्यक्रम का स्थान लिया है।
मार्च 2026 में यह योजना एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है — लोकप्रिय वर्गों के लिए प्रत्यक्ष सब्सिडी चरणबद्ध तरीके से समाप्त की जा रही है और फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा भारी वाणिज्यिक वाहनों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं वित्त (2026)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल बजट | ₹10,900 करोड़ (2024–2028) |
| बजट 2026 आवंटन | ₹1,500 करोड़ (FY 2026-27) — ₹4,000 करोड़ से रणनीतिक कमी |
| प्रभाव | 22 लाख से अधिक EVs को प्रोत्साहन (19 लाख 2-व्हीलर + 3 लाख 3-व्हीलर) |
| विस्तार | समग्र कार्यकाल 31 मार्च 2028 तक विस्तारित; 2W/3W की खरीद सब्सिडी 31 मार्च 2026 को समाप्त |
2. सब्सिडी एवं प्रोत्साहन संरचना (वर्तमान चरण)
2025–26 चक्र में प्रोत्साहन राशि आधी कर दी गई है — "टेपरिंग" योजना के तहत मूल्य झटकों से बचाने के लिए:
| वाहन वर्ग | FY 2025-26 प्रोत्साहन | प्रति वाहन अधिकतम | अधिकतम Ex-factory मूल्य |
|---|---|---|---|
| ई-2 व्हीलर | ₹2,500 / kWh | ₹5,000 | ₹1.5 लाख |
| ई-रिक्शा | ₹2,500 / kWh | ₹12,500 | ₹2.5 लाख |
| ई-3 व्हीलर (L5) | ₹2,500 / kWh | ₹25,000 | ₹5 लाख |
ई-वाउचर प्रणाली: खरीद के समय डीलरशिप पर आधार-प्रमाणित face-authenticated वाउचर जनरेट होता है — छूट तुरंत इनवॉइस में लागू।
3. नए वर्गों एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस (2026)
9 प्रमुख शहरों में 14,028 ई-बसें — GCC मॉडल के तहत
शून्य-उत्सर्जन आपातकालीन चिकित्सा परिवहन का नया प्रोत्साहन
पुराने ICE ट्रक की Scrapping Certificate जमा पर प्रोत्साहन
72,300 फास्ट चार्जर — 22,100 कारों के लिए + 48,400 2W/3W के लिए
4. पात्रता एवं अनुपालन
"परिपक्वता" संकेत — 2026 का महत्व
2026 का बजट कटौती सरकार का यह संदेश है कि ई-2W और 3W ने पेट्रोल वाहनों के साथ TCO (Total Cost of Ownership) समानता प्राप्त कर ली है। भविष्य की निधि चार्जिंग नेटवर्क और बैटरी R&D की ओर पुनर्निर्देशित होगी।
मार्च 2026 स्थिति: 2W/3W की प्रत्यक्ष सब्सिडी 31 मार्च 2026 को बंद — इंफ्रा और भारी वाहनों पर फोकस
REPM योजना
Scheme to Promote Manufacturing of Sintered Rare Earth Permanent Magnets | नवंबर 2025 | ₹7,280 करोड़REPM योजना (Scheme to Promote Manufacturing of Sintered Rare Earth Permanent Magnets) एक रणनीतिक मिशन-मोड पहल है, जिसे नवंबर 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी और जनवरी 2026 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
इसका लक्ष्य EV, पवन टरबाइन और रक्षा प्रणालियों में उपयोग होने वाले उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट के लिए चीन पर भारत की लगभग पूर्ण निर्भरता समाप्त करना है।
1. वित्तीय आवंटन एवं लक्ष्य (2026)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल बजट | ₹7,280 करोड़ |
| लक्षित क्षमता | 6,000 MTPA एकीकृत विनिर्माण क्षमता |
| लाभार्थी कंपनियाँ | 5 कंपनियाँ — वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली से; प्रत्येक को 1,200 MTPA तक आवंटन |
| समयसीमा | 7 वर्ष — 2 वर्ष संयंत्र स्थापना + 5 वर्ष प्रोत्साहन वितरण |
2. प्रोत्साहन संरचना (द्विस्तरीय सहायता)
| घटक | राशि | सहायता का प्रकार |
|---|---|---|
| बिक्री-लिंक्ड प्रोत्साहन | ₹6,450 करोड़ | 5 वर्षों में मैग्नेट की वास्तविक बिक्री पर |
| पूंजी सब्सिडी | ₹750 करोड़ | एकीकृत विनिर्माण सुविधाओं के निर्माण हेतु |
3. "सिरे से सिरे तक" मूल्य श्रृंखला
4. रणनीतिक "रेयर अर्थ कॉरिडोर" (बजट 2026 अपडेट)
भारी खनिज रेत और मोनाज़ाइट प्रसंस्करण पर ध्यान
मौजूदा बीच सैंड खनिज भंडार से डाउनस्ट्रीम मैग्नेट उत्पादन
5. REPM 2026 में क्यों महत्वपूर्ण है
भारत अपनी 80–90% REPM जरूरत चीन से आयात करता है (2025 में $221 मिलियन)
EV मोटर और अपतटीय पवन टरबाइन के लिए ये मैग्नेट "हृदय" समान हैं
एयरोस्पेस और सैन्य हार्डवेयर में सटीक सेंसर, एक्चुएटर और मार्गदर्शन प्रणालियों के लिए आवश्यक
भारत का "मोनाज़ाइट" लाभ
भारत के पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ-मृदा भंडार (~1.315 करोड़ टन मोनाज़ाइट) है। REPM योजना इस क्षमता को अनलॉक करने का पहला ठोस प्रयास है, जो मिडस्ट्रीम प्रसंस्करण तकनीक के अभाव में अब तक अनुपयोगी था।
लॉन्च: नवंबर 2025 कैबिनेट अनुमोदन → जनवरी 2026 औपचारिक शुभारंभ | दुर्लभ मृदा कॉरिडोर: 4 राज्यों में
NAMASTE योजना
National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालयNAMASTE योजना (National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem) सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण केंद्रीय पहल है।
मार्च 2026 में यह योजना अपने प्रमुख प्रोफाइलिंग चरण से सामाजिक सुरक्षा लाभ वितरण की ओर बढ़ चुकी है और कर्मचारियों को "सेनिप्रेन्योर" (स्वच्छता उद्यमी) बनाने पर केंद्रित है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं सामाजिक प्रोफाइल (फरवरी 2026)
| मेट्रिक | उपलब्धि / डेटा |
|---|---|
| कुल कचरा बीनने वाले (Waste Pickers) प्रोफाइल | 1.52 लाख (35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में) |
| सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मचारी (SSWs) | ~89,200 सत्यापित |
| लिंग वितरण (Waste Pickers) | 51.3% पुरुष |
| सामाजिक संरचना | 60.3% SC वर्ग |
| भौगोलिक कवरेज | भारत के सभी 4,800+ शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) |
2. मुख्य घटक एवं लाभ (2026)
74,600 से अधिक SSWs को आयुष्मान कार्ड — प्रति परिवार ₹5 लाख तक स्वास्थ्य बीमा
उच्च-ग्रेड PPE किट और सुरक्षा उपकरण — H₂S और CH₄ जैसी जहरीली गैसों से बचाव
व्यक्ति को ₹5 लाख तक और समूह के प्रत्येक सदस्य को ₹3.75 लाख तक
कौशल प्रशिक्षण के दौरान ₹3,000/माह | वैकल्पिक आजीविका हेतु सिलाई मशीनें
3. "सेनिप्रेन्योर" मॉडल
4. Zero Fatality जनादेश
यांत्रिक सेवाएँ बुक करने के लिए — कोई मैनुअल सीवर प्रवेश नहीं
प्रत्येक जिले में — खतरनाक सफाई घटनाओं के लिए कानूनी जवाबदेही
Bandicoot जैसे रोबोट — उच्च जोखिम वाली रुकावटों के लिए
विकसित भारत 2047 — संतृप्ति चरण
NAMASTE "संतृप्ति चरण" (FY 2023-24 से 2025-26) में है। ₹130 करोड़ बजट 2025-26 के साथ यह योजना ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों को औपचारिक सर्कुलर इकॉनमी में एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मार्च 2026 स्थिति: प्रोफाइलिंग चरण पूर्ण — सामाजिक सुरक्षा वितरण और "सेनिप्रेन्योर" मॉडल लागू
आयुष्मान भारत — PM-JAY
Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana | विश्व की सबसे बड़ी सरकारी-वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजनाआयुष्मान भारत — प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) विश्व की सबसे बड़ी सरकारी-वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना है। मार्च 2026 तक, इसका दायरा विशेष रूप से सभी वरिष्ठ नागरिकों (आय-निरपेक्ष) को शामिल करने के साथ काफी विस्तृत हो चुका है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं वित्त (2026)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| बजट आवंटन FY 2026-27 | ₹9,500 करोड़ |
| अस्पताल में भर्ती लक्ष्य | 3 करोड़ (30 मिलियन) भर्तियाँ |
| दावा भुगतान लक्ष्य | ₹36,000 करोड़ FY27 (63% वृद्धि) |
| कवरेज | 12.34 करोड़ परिवार (~55 करोड़ व्यक्ति) + सभी पात्र वरिष्ठ नागरिक |
| आयुष्मान कार्ड | 43.4 करोड़ से अधिक कार्ड जारी |
2. 2026 का बड़ा अपडेट: आयुष्मान वय वंदना (वरिष्ठ नागरिक कवरेज)
70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिक — आय की कोई सीमा नहीं
प्रति वर्ष ₹5 लाख — मध्यम और उच्च आय वर्ग के वरिष्ठ भी पात्र
PMJAY परिवार का वरिष्ठ सदस्य: अतिरिक्त ₹5 लाख का व्यक्तिगत शेयर-मुक्त टॉप-अप
"आयुष्मान वय वंदना" कार्ड — आधार से लिंक
3. लाभ एवं कवरेज
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कैशलेस / पेपरलेस | अस्पताल में अग्रिम भुगतान नहीं — सरकार सीधे अस्पताल को भुगतान करती है |
| पहले से मौजूद बीमारियाँ | नामांकन के पहले दिन से सभी बीमारियाँ कवर |
| अस्पताल प्रवास | भर्ती से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद के खर्च शामिल |
| प्रक्रियाएँ कवर | 1,900+ चिकित्सा प्रक्रियाएँ — कैंसर सर्जरी, हृदय बाईपास, स्टेंटिंग आदि |
4. नेटवर्क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर (2026)
33,000 से अधिक अस्पताल — सरकारी और निजी दोनों
15,733 निजी अस्पताल — उच्च गुणवत्ता की निजी देखभाल गरीबों को सुलभ
86.3 करोड़ से अधिक ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते) — सहज डिजिटल रिकॉर्ड
5. पात्रता जाँच एवं आवेदन
महत्वपूर्ण नोट — दो श्रेणियाँ
PMJAY गरीबों के लिए हक-आधारित (Entitlement-based) योजना है (SECC 2011 डेटा) — लेकिन 70+ वर्ष के लोगों के लिए पंजीकरण-आधारित है। अर्थात् वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय रूप से पंजीकरण करना होगा।
मार्च 2026 स्थिति: आयुष्मान वय वंदना पूर्णतः चालू | 43.4 करोड़ कार्ड जारी | 33,000+ अनुबंधित अस्पताल
स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान
SNSPA | 17 सितंबर 2025 | स्वास्थ्य मंत्रालय + महिला एवं बाल विकास मंत्रालयस्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान (SNSPA) एक विशाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य जन-जागरण अभियान है, जिसे प्रधानमंत्री ने 17 सितंबर 2025 को शुरू किया। मार्च 2026 में यह भारत का महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य आउटरीच कार्यक्रम माना जाता है।
अभियान का दर्शन: "यदि माँ स्वस्थ है, तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है" — विकसित भारत 2047 का एक मुख्य स्तंभ।
1. प्रमुख आँकड़े एवं विश्व रिकॉर्ड
| उपलब्धि | आँकड़ा |
|---|---|
| कुल स्वास्थ्य शिविर | 18 लाख से अधिक शिविर |
| कुल भागीदारी | लगभग 11 करोड़ नागरिक |
| महिला लाभार्थी | 6.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को सेवाएँ |
| गिनीज रिकॉर्ड 1 | एक महीने में 3.21 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य मंच पर पंजीकरण |
| गिनीज रिकॉर्ड 2 | एक सप्ताह में 9.94 लाख लोगों का स्तन कैंसर जाँच हेतु ऑनलाइन पंजीकरण |
| गिनीज रिकॉर्ड 3 | एक सप्ताह में 1.25 लाख लोगों का vital signs जाँच हेतु पंजीकरण |
2. स्वास्थ्य परिणाम एवं जाँच (चरण 1)
| स्वास्थ्य सेवा | उपलब्धि |
|---|---|
| उच्च रक्तचाप | 1.78 करोड़ नागरिकों की जाँच |
| मधुमेह | 1.72 करोड़ नागरिकों की जाँच |
| एनीमिया | 1.51 करोड़ की जाँच |
| कैंसर (स्तन एवं गर्भाशय) | 56 लाख+ महिलाओं की जाँच |
| टीबी | 85 लाख+ नागरिकों की जाँच |
| प्रसव पूर्व जाँच (ANC) | 62.6 लाख गर्भवती महिलाएँ |
| बाल टीकाकरण | 1.43 करोड़ जीवन-रक्षक टीके लगाए |
3. कार्यान्वयन ढाँचा
प्रत्येक स्वास्थ्य शिविर की रियल-टाइम निगरानी — पारदर्शिता और फॉलो-अप
1.14 करोड़ छात्र | 94 लाख SHG सदस्य | 5 लाख पंचायत प्रतिनिधि
आयुष्मान आरोग्य मंदिर, CHC और दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट
4. 2026 में रणनीतिक फोकस क्षेत्र
आयुष्मान भारत से लिंकेज
अभियान के दौरान गंभीर बीमारी पाई गई प्रत्येक महिला को PM-JAY (₹5 लाख तक मुफ्त इलाज) से जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में अकेले 10.69 लाख नए आयुष्मान कार्ड विशेष रूप से अभियान प्रतिभागियों को जारी किए गए।
मार्च 2026 स्थिति: शिविर चरण पूर्ण (सितंबर–अक्टूबर 2025) — सिद्धांत दैनिक संचालन में एकीकृत | 3 गिनीज विश्व रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना
PMSSY — 2003 में घोषित, 2006 में शुरू | क्षेत्रीय स्वास्थ्य असंतुलन दूर करने की योजनाप्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) — पहली बार 2003 में घोषित और 2006 में औपचारिक रूप से शुरू — भारत में सस्ती तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की क्षेत्रीय असमानता दूर करने की प्राथमिक योजना है।
मार्च 2026 में यह योजना "संतृप्ति एवं संचालन चरण" में है — केवल निर्माण से आगे बढ़कर नए AIIMS में रिक्तियाँ भरने और विशेष विभाग खोलने पर ध्यान है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं बजट 2026
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल आवंटन FY 2026-27 | ₹11,307 करोड़ (नए AIIMS के स्थापना व्यय सहित) |
| नए AIIMS स्वीकृत | 22 — 6 पूर्णतः कार्यरत; 16 विभिन्न चरणों में |
| GMC उन्नयन | 75 सरकारी मेडिकल कॉलेज — सुपर-स्पेशियलिटी ब्लॉक के लिए स्वीकृत |
| MBBS सीटें | भारत में 1.29 लाख से अधिक MBBS सीटें — लक्ष्य 1.37 लाख |
2. दो मुख्य घटक
750–960 बेड | 15–20 सुपर-स्पेशियलिटी विभाग | 100 MBBS + 60 B.Sc. Nursing सीटें प्रति वर्ष | PG शिक्षा एवं शोध विंग
8–10 सुपर-स्पेशियलिटी विभाग + 150–250 अतिरिक्त बेड | केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 (NE/पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10)
3. 22 AIIMS की स्थिति (मार्च 2026)
| स्थिति | संख्या | उदाहरण स्थान |
|---|---|---|
| पूर्णतः कार्यरत | 6 | भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर, ऋषिकेश |
| OPD & IPD चालू | 12 | रायबरेली, नागपुर, मंगलगिरी, गोरखपुर, बठिंडा, बिबीनगर, कल्याणी, देवघर, बिलासपुर, राजकोट, गुवाहाटी, विजयपुर (जम्मू) |
| केवल MBBS / निर्माणाधीन | 4 | मदुरई (अक्टूबर 2026 अनुमानित), अवंतीपोर, रेवाड़ी (माजरा), दरभंगा |
4. 2026 की चुनौतियाँ और समाधान
चिकित्सा शिक्षा पर प्रभाव
PMSSY भारत में "सीटों के विस्फोट" का इंजन रहा है। UG सीटें 2014 के बाद 120% से अधिक और PG सीटें 140% से अधिक बढ़ी हैं — ग्रामीण भारत में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने में सहायक।
मार्च 2026 स्थिति: 6 AIIMS पूर्णतः कार्यरत | 12 OPD/IPD चालू | 4 निर्माणाधीन | ₹11,307 Cr बजट 2026-27
जल जीवन मिशन
Jal Jeevan Mission — हर घर जल | अगस्त 2019 में शुरू | जल शक्ति मंत्रालयजल जीवन मिशन (JJM), अगस्त 2019 में शुरू, भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में से एक है जिसका लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण घर को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करना है।
मार्च 2026 तक यह मिशन "विस्तार चरण" से "समेकन एवं स्थिरता चरण" में आ चुका है — बुनियादी ढाँचे की निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान है।
1. प्रमुख आँकड़े एवं 2026 प्रगति
ग्रामीण घरों में लगभग 81.72% को नल का पानी (7 मार्च 2026 तक)
19.36 करोड़ में से 15.82 करोड़ घरों को नल जल आपूर्ति
2019 में केवल 3.23 करोड़ (17%) — अब तक 12.59 करोड़ नए कनेक्शन जोड़े
2.72 लाख से अधिक गाँव और 192 जिले 100% प्रमाणित
2. बजट 2026-27 अपडेट
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आवंटन | ₹67,670 करोड़ FY 2026-27 के लिए |
| विस्तार | मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तक विस्तारित (मूल 2024 था) |
| फंड वृद्धि | पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में ~300% वृद्धि — शेष 18% घरों के लिए अंतिम धक्का |
3. राज्यवार प्रदर्शन (मार्च 2026)
| स्थिति | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश |
|---|---|
| 100% प्रमाणित / रिपोर्टेड | गोवा, तेलंगाना, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और कई केंद्र शासित प्रदेश (A&N द्वीप, पुडुचेरी, D&NH, D&D) |
| उच्च प्रगति (>90%) | बिहार (95.7%), उत्तर प्रदेश (91.2%), महाराष्ट्र (90.4%) |
| फोकस राज्य (<60%) | पश्चिम बंगाल (56.6%), झारखंड (55.1%), केरल (54.8%), राजस्थान (58.5%) |
4. 2026 की रणनीतिक धुरी: O&M और स्थिरता
सामुदायिक नेतृत्व — "जन आंदोलन"
JJM अनूठा है क्योंकि यह एक "जन आंदोलन" है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSCs) — जिनमें 50% महिला सदस्य हैं — अपनी जल आपूर्ति की योजना और प्रबंधन स्वयं करती हैं। अधिकांश कनेक्शन JJM-IMIS डैशबोर्ड से जोड़े गए हैं।
मार्च 2026 स्थिति: 81.72% कवरेज | 15.82 करोड़ घर जोड़े | 2.72 लाख+ गाँव प्रमाणित | दिसंबर 2028 तक विस्तारित