जैव अणु (Biomolecules) का परिचय

  • जीवित तंत्र में पाये जाने वाले समस्त अणु जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड (वसा), विटामिन जैव अणु (Biomolecules) कहलाते हैं। जैव अणु जीवित प्राणी के शरीर के निर्माण तथा उनकी वृद्धि एवं पोषण के लिए उत्तरदायी है।
  • जैव अणु कार्बनिक पदार्थ हैं जिन्हें हम अपने भोजन के माध्यम से प्राप्त करते हैं। पौधों में ये क्षमता है कि वह अपने लिए जैव अणु का निर्माण स्वयं कर सकते हैं।
  • प्रमुख जैव अणु का विवरण इस प्रकार है- (ऊपर दिए गए टैब्स पर क्लिक करें)

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

• कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का बना यौगिक है जिसका सामान्य सूत्र Cx(H2O)y होता है। कार्बोहाइड्रेट को कार्बन का हाइड्रेट भी कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 होता है।

• वर्तमान में कई ऐसे कार्बोहाइड्रेट प्राप्त हुए हैं जिनमें कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन के अलावे अतिरिक्त तत्व भी होते है और उनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 नहीं होता है। अतः कार्बोहाइड्रेट की नवीनतम परिभाषा इस प्रकार दी जाती है-

"कार्बोहाइड्रेट एक ऐसा यौगिक है जिसमें कम से कम एक हाइड्रॉक्सिल ग्रुप (OH) एवं एक कीटोन ग्रुप होता है अथवा ऐल्डिहाइड (CHO) ग्रुप होता है।"

• कार्बोहाइड्रेट प्राकृतिक यौगिक है जो मुख्यतः पौधों में पाये जाते हैं। प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकता-भोजन (glucose), वस्त्र तथा आवास (Cellulose) को पूरा करते है।

• कार्बोहाइड्रेट को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है- मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड

1. मोनोसैकेराइड (Monosaccharide)

  • यह सबसे सरलतम कार्बोहाइड्रेट जिसमें कार्बन परमाणु की संख्या 2 से 7 तक होती है।
  • प्रमुख: ग्लिसरेल्डिहाइड (C3H6O3), इरिथ्रोज (C4H8O4), राइबोज (C5H10O5), ग्लूकोज (C6H12O6), फ्रक्टोज (C6H12O6), गैलेक्टोज (C6H12O6), मानोहेप्टुलोज (C7H14O7)

2. ओलिगोसैकेराइड (Oligosaccharide)

जल अपघटन (Hydrolysis) करने पर 2-10 मोनोसैकेराइड अणु प्राप्त होत हैं।

  • (i) Disaccharide: 2 अणु प्राप्त होते है।
    उदाहरण: सुक्रोज (Cane-Sugar), माल्टोज (Malt-Sugar), लैक्टोज (Milk sugar)।
  • (ii) Trisaccharide: 3 अणु प्राप्त होते है।
    उदाहरण: रैफीनोज (C18H32O16) - कपास की रूई में, जल अपघटन पर गैलेक्टोज, फ्रक्टोज तथा ग्लूकोज देता है।

3. पॉलीसैकेराइड (Polysaccharide)

जटिल / उच्च अणुभार वाले। स्वाद में मीठे नहीं, जल में अघुलनशील।

  • (i) सेल्युलोज: पौधे के कोशिकाभित्ति का मुख्य घटक। प्रकृति में सबसे ज्यादा।
  • (ii) ग्लाइकोजेन: जंतु के शरीर में अतिरिक्त भोजन, जल में घुलनशील।
  • (iii) स्टार्च: अनाजों (गेहूँ, मक्का) तथा आलू में।
  • (iv) हैपेरीन: संयोजी उत्तक के मास्ट कोशिकाओं में, रूधिर को जमने से रोकता है।
  • (v) काइटीन: कीटो (Arthropoda) का बाह्य कंकाल।

जंतु (Human and Animal) के शरीर में कार्बोहाइड्रेट के कार्य-

  • श्वसन के दौरान ऊर्जा उत्पन्न करने में मुख्य रूप कार्बोहाइड्रेट (Glucose) का उपयोग किया जाता है।
  • यह शरीर के टूट-फूट तथा मरम्मत में सहायक होते है।
  • यह ग्लाइकोजेन में परिवर्तित होकर यकृत में संचित रहता है। इसके अलावे ये पेशीय ग्लाइकोजेन के रूप में पेशियों में संचित रहता है।
  • यह वसा में भी रूपांतरित हो सकता है।

प्रोटीन (Protein)

  • प्रोटीन ग्रीक भाषा के प्रोटीओस (Proteious) शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- 'सर्वोच्च महत्त्व'। प्रोटीन का नामकरण मूल्डर (Mulder) ने किया था।
  • प्रोटीन उच्च अणुभार वाले नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ है। मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन से बना होता है। (इसके अलावे सल्फर, फॉस्फोरस, आयोडीन, आयरन, कॉपर, जिंक, मैंगनीज)।
  • प्रोटीन ऐमीनो अम्ल का बहुलक है। ऐमीनो अम्ल पेप्टाइड बंधन से जुड़े रहते हैं। आंशिक जल-अपघटन = पेप्टाइड; पूर्ण जल-अपघटन = ऐमीनो अम्ल।

प्रोटीन के प्रकार (गुणों के आधार पर)

1. सरल प्रोटीन (Simple Protein): केवल अमीनो अम्ल के बने होते हैं।
  • ग्लोब्युलीन: जंतु व पौधा दोनों में। अंडपीत (अंडे का पीला भाग)। जल में अघुलनशील, अम्ल में घुलनशील।
  • हिस्टोन: हिमोग्लोबिन के ग्लोबीन व थाइमस ग्रंथि में। जल में घुलनशील।
  • एल्ब्युमीन: अंडे के उजले भाग में, थोड़ा दूध में।
  • प्रोटामीन: सालमन व हेरिंग मछलियों में।
2. युग्मित प्रोटीन (Conjugated Protein): ऐमीनो अम्ल + अन्य तत्व के अणु।
  • क्रोमोप्रोटीन: + Fe, Cu, Mg या Co (उदा: रक्त का हिमोग्लोबीन, नेत्र का रेटीना)।
  • न्यूक्लिओप्रोटीन: + DNA, RNA (कोशिका के केन्द्रक में)।
  • ग्लाइकोप्रोटीन: + कार्बोहाइड्रेट (उदा: लार का म्यूसिन)।
  • फॉस्फोप्रोटीन: + फॉस्फोरिक अम्ल (उदा: दूध का कैसीन)।
3. व्युत्पन्न प्रोटीन (Derived Protein): जल अपघटन से प्राप्त। उदा: प्रोटिअन्स, पेप्टोन्स, पेप्टाइड्स, प्रोटिओसेस।

प्रोटीन के प्रकार (आण्विक संरचना के आधार पर)

  • 1. रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Protein): पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ मजबूत अंतराण्विक बल द्वारा रेशेदार संरचना में। जल में अविलेय। (उदा: बाल, त्वचा, ऊन का किरेटीन; मांसपेशी का मायोसीन)।
  • 2. गोलीय प्रोटीन (Globular Protein): अणु गोलाकार संरचना से जुड़े। (उदा: हीमोग्लोबिन, इंसुलीन)।

ऐमीनों अम्ल (Amino Acid)

वे पदार्थ जिसमें एमीनो ग्रुप (-NH2) तथा कार्बोक्सिलिक ग्रुप (-COOH) उपस्थित रहता है। यह प्रोटीन बनने की मूल इकाई है। प्रोटीन बनने में न्यूनतम 20 ऐमीनो अम्ल भाग लेते है।

1. आवश्यक (Essential) - 10

जंतु शरीर में संश्लेषित नहीं होते, भोजन से लेना जरूरी।
(वेलीन, ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन, फिनाइल एलेनिन, ट्रिप्टोफेन, थियोनीन, मिथियोनीन, लाइसिन, आर्जीनीन, हिस्टिडीन)

2. अनावश्यक (Non-essential) - 10

जंतु कोशिकाओं (मुख्यतः यकृत) में संश्लेषित होते है。
(ग्लाइसीन, एलेनिन, टाइरोसीन, सीरीन, प्रोलीन, हाइड्रोक्सीप्रोलीन, सिस्टीन, सिस्टाईन, ऐस्पार्टिक एसिड, ग्लूटानिक एसिड)

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • पादप स्त्रोत: मटर, सोयाबीन, राजमा, चना, मूंग आदि।
  • जंतु स्त्रोत: पनीर, दूध, मछली, माँस, अंडा। (सोयाबीन एक मात्र गैर-पशु प्रोटीन स्त्रोत है जिसमें सभी आवश्यक ऐमीनो अम्ल पाये जाते हैं)।
  • विकृतिकरण (Denaturation): ताप, दाब, pH-परिवर्तन के कारण जब प्रोटीन की संरचना बिखर जाती है और सक्रियता समाप्त हो जाती है।

प्रोटीन के कार्य:

  1. सामान्य क्रियाविधि एवं वृद्धि हेतु।
  2. कोशिका जीवद्रव्य बनने व टूटी-फूटी कोशिका के मरम्मत के लिए।
  3. कार्बोहाइड्रेट की तरह ऊर्जा उत्पन्न करना।
  4. हॉर्मोन तथा एंजाइम बनने हेतु।

लिपिड (Lipids / वसा)

• वसा (Fats), तेल, घी जैसे यौगिक। कार्बोहाइड्रेट की तरह हाइड्रोजन, कार्बन, आक्सीजन से बने होते हैं (अनुपात अलग)। जल में अघुलनशील, कार्बनिक विलायक में घुलनशील।
• ग्लिसरॉल तथा फैटी अम्ल से मिलकर बना होता है। सामान्य सूत्र: CH3(CH2)n-COOH

1. साधारण लिपिड (Simple lipid)

फैटी अम्ल तथा ऐल्कोहॉल का एस्टर है। (उदा: Fats, Oil, Wax)। कमरे के ताप पर ठोस = वसा (Fats), तरल = तेल (Oil)।

(i) संतृप्त वसा (Saturated)

C-परमाणु, हाइड्रोजन द्वारा संतृप्त। कमरे के ताप पर ठोस। (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक)

  • ब्यूटिरिक अम्ल: मक्खन में
  • कैपरिलिक अम्ल: नारियल व ताड़ के तेल में
  • पैलमिटिक अम्ल: ताड़ के तेल व जंतु वसा में
  • ऐराकिडिक अम्ल: मटर (Peanut) के तेल में

(ii) असंतृप्त वसा (Unsaturated)

C-परमाणु, हाइड्रोजन द्वारा संतृप्त नहीं। कमरे के ताप पर तरल (तेल)। (स्वास्थ्य के लिए बेहतर)

  • पालमिटोलेईक अम्ल: दूध तथा सारडाइन में
  • उलेइक अम्ल: जैतून (Olive) के तेल में
  • इरूसिक अम्ल: सरसों के तेल में

2. संयुक्त लिपिड (Compound)

फैटी अम्ल + ऐल्कोहॉल + फोस्फोरस, नाइट्रोजन, सल्फर या प्रोटीन।

प्रमुख: फॉस्फोलिपिड, ग्लाइकोलिपिड, सल्फोलिपिड, लिपोप्रोटीन।

3. व्युत्पन्न लिपिड (Derived)

साधारण व संयुक्त वसा के जल-अपघटन (Hydrolysis) से प्राप्त।

प्रमुख: जंतुओं का कोलेस्टेरॉल, पौधों का एरगोस्टेरॉल, लिंग हॉर्मोन (Sexhormone) के स्टेरॉयडस (Steroids)।

लिपिड के कार्य:

  1. जंतु इसे ऊर्जा स्त्रोत के रूप में प्रयोग होता है।
  2. जंतु में कई पकार के विटामिन तथा हॉर्मोन बनने हेतु लिपिड आवश्यक है।
  3. इसका इस्तेमाल परिरक्षक तथा रौशनी उत्पन्न करने में किया जाता है।
  4. लिपिड भोजन में अच्छे स्वाद और गंध उत्पन्न करता है।
  5. कोशिका झिल्ली बनने हेतु लिपिड एक अनिवार्य घटक है।

विटामिन (Vitamins)

• जटिल कार्बनिक यौगिक जिनकी थोड़ी मात्रा स्वास्थ्य तथा वृद्धि हेतु अनिवार्य है। इसे 'सहायक आहार' कहा जाता है।

• शरीर में निर्मित नहीं होते (पौधे अच्छे स्त्रोत हैं), परंतु विटामिन A (कैरोटीन से) तथा विटामिन K (आहारनाल के जीवाणु द्वारा) का संश्लेषण शरीर में हो सकता है।

• शरीर में होन वाले विटामिन की कमी को 'हाइपोविटामिनोसिस' कहा जाता है।

1. वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, K, E)

विटामिन A

सूत्र: C20H30O | नाम: Retinol

स्त्रोत: गाजर, फल, सब्ज, मछली, अंडा आदि।

कमी से रोग: Xerophthalmia, Phrynoderma, Night Blindness, Weakness

विटामिन D

सूत्र: C28H44O | नाम: Calciferol

स्त्रोत: कॉड का यकृत, अंडपीत, मक्खन, मलाई, घी, सूर्य का प्रकाश।

कमी से रोग: Rickets (बच्चों में), Ustcomalacia (व्यस्को में), Night Blindness, Weakness

नोट: इसे हार्मोन भी कहा जाता है। अधिकता विषाक्त होती है (किडनी क्षतिग्रस्त)। सूर्य के UV प्रकाश से त्वचा का लीपिड इर्गेस्टरॉल, विट-D में बदलता है।

विटामिन K

सूत्र: C17H46O2 | नाम: Naphthaquinone

स्त्रोत: पालक, पत्तागोभी, फूलगोभी, टमाटर, दूध आदि।

कमी से रोग: रक्तस्त्राव की अधिक संभावना। (इसे एंटी हीमीरोजिक विटामिन कहते हैं)

विटामिन E

सूत्र: C29H50O2 | नाम: Tocopherol

स्त्रोत: सोयाबीन, सलाद की पत्तियाँ, पौधे के बीजख दूध, मांस आदि।

कमी से रोग: जनन क्षमता में कमी आ जाती है।

2. जल में घुलनशील विटामिन (B-complex, C)

यह शरीर में संचित नहीं हो सकता है क्योंकि यह जल में घुल जाते हैं तथा मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं।

विटामिन B1

C12H14O4 | Thiamine

स्त्रोत: चावल, अंडा, बादाम, आलू, सब्ज आदि।

कमी: बेरीबेरी रोग (भूख कम, वृद्धि रूकना)।

विटामिन B2

C17H20N4O6 | Riboflavin

स्त्रोत: हल्दी, सब्ज, अंडा, दूध आदि।

कमी: फंटोफोबिया (कम प्रकाश में दिखाई न देना)।

विटामिन B3

C6H5O2N | Nicotinic Acid / Niacin

स्त्रोत: मांस, यकृत, अंडा, दूध, यीस्ट, मछली, हरे मटर आदि।

कमी: पेलेग्रा तथा अनिद्रा।

विटामिन B5

C19H17O5N | Pantothenic acid

स्त्रोत: दूध, यकृत, टमाटर, गोभी, आलू आदि।

कमी: चर्म रोग, बाल जल्द सफेद होना।

विटामिन B6

C8H12O3N | Pyridoxine

स्त्रोत: मां, अनाज, दूध, हरी सब्ज आदि।

कमी: तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी, एनीमिया, लिंफोसाइट कमी।

विटामिन B7 (H)

C10H16O3N2S | Biotin

स्त्रोत: मांस, फल, अंडा, दूध आदि। (आंत में बैक्टीरिया द्वारा भी)।

कमी: भूख नहीं लगना, पेशी दर्द।

विटामिन B9

C19H19O6N17 | Folic Acid

स्त्रोत: सब्जी, फल, अंडा, सेम, यीस्ट।

कमी: WBC में कमी (ल्यूकोपेनिया)।

विटामिन B12

C63H90O14PCo | Cabalamine

स्त्रोत: दूध-उत्पाद, मांस, मछली, अंडा आदि।

कमी: ऐमीनिया। (इसमें कोबाल्ट Co पाया जाता है)।

विटामिन C

C6H8O6 | Ascorbic acid

स्त्रोत: नींबू, संतरा, टमाटर, सब्ज, ताजे मांस आदि।

कमी: स्कर्वी रोग तथा Mental depression.

एंजाइम (Enzymes)

  • Enzyme (एंजाइम) प्रोटीन से बने ऐसे पदार्थ है जो जीवों में होने वाले सभी जैविक प्रक्रियाओं (श्वसन, पाचन, प्रकाश संश्लेषण आदि) को उत्प्रेरित करते हैं।
  • एंजाइम को जैविक उत्प्रेरक भी कहा जाता है। इसके अभाव में शरीर के अंदर उपापचय (Metabolism) की क्रिया सही तरीके से सम्पन्न नहीं हो पायेगा।
  • एंजाइम का निर्माण कोशिकाद्रव्य में होता है।
    • अंत: एंजाइम (Endo Enzymes): कुछ एंजाइम कोशिका के भीतर ही सक्रिय रहते हैं।
    • बाह्य एंजाइम (Exoenzyme): अधिकांश एंजाइम कोशिकाद्रव्य में बनकर कोशिका के बाहर सक्रिय होते हैं।
  • शरीर के कुछ न्यूक्लिक अम्ल (RNA, DNA) भी एंजाइम की तरह काम करते है, ऐसे एंजाइम को राइबोजाइम कहते है।
  • एंजाइम की कार्य करने की क्षमता pH मान और तापमान पर निर्भर करता है। हर एंजाइम अनुकूलतम pH या अनुकूलतम तापमान पर सबसे अधिक तेजी से रसायनिक क्रिया को सम्पन्न करता है। pH तथा तापमान के घटने या बढ़ने से एंजाइम की कार्यक्षमता घट जाती है।

खनिज तत्व (Minerals)

• मानव शरीर में कार्बनिक पदार्थ के अलावे अल्पमात्रा में लगभग 20 प्रकार के खनिज भी मौजूद रहते है।

• ये खनिज अल्पमात्रा में ही सही परंतु इनके बिना शरीर का सुचारू रूप से कार्य करना असंभव है। इन्हें अल्प पोषक तत्व कहा जाता है।

• आवश्यकता के मुताबिक 2 भागों में विभाजित: लघु तत्व (Minor) तथा अल्प तत्व (Trace)

लघु खनिज (Minor Minerals)

खनिज तत्व स्रोत महत्त्व कमी के प्रभाव
कैल्शियम दूध, पनीर, हरी सब्जियाँ, फलियाँ, अनाज, अंडे, मछली दाँतों और हड्डियों की रचना, रुधिर स्कंदन, तंत्रिकाओं एवं पेशियों के कार्य दाँत एवं हड्डियाँ दुर्बल, शरीर की वृद्धि अवरुद्ध
फास्फोरस दूध, माँस, अनाज, अंडे, मछली दाँतों और हड्डियों की रचना, अम्ल-क्षार संतुलन; ATP, DNA, RNA आदि का घटक दाँत व हड्डियाँ कमजोर, शरीर की वृद्धि एवं कार्यिकी अवरुद्ध
गंधक (Sulphur-S) अंडे, माँस, पनीर, मछली, सेम, ब्रोकली, गोभी, शलजम कई एमीनो अम्लों तथा कुछ हार्मोन्स एवं विटामिनों का घटक एवं कैरोटीन के संश्लेषण के लिए आवश्यक प्रोटीन की कमी तथा प्रोटीन उपापचय की गड़बड़ियाँ
पोटैशियम माँस, दूध, अनाज, फल, हरी सब्जियाँ अम्ल-क्षार संतुलन, जल संतुलन, तंत्रिकाओं एवं पेशियों की कार्यिकी, हृदय स्पंदन निम्न रक्तचाप, पेशियों की दुर्बलता, अंगघात की आशंका
क्लोरीन खाने वाला नमक अम्ल-क्षार संतुलन, जल संतुलन भूख की कमी, पेशियों की ऐंठन, थकावट
सोडियम खाने वाला नमक अम्ल-क्षार संतुलन, जल-संतुलन, हृदय स्पंद निम्न रक्तचाप, भूख की कमी, पेशियों की ऐंठन, थकावट
मैग्नीशियम दूध, साबुत अनाज, मछली, माँस, हरी सब्जियाँ दाँतों एवं हड्डियों की रचना, तंत्रिका तंत्र की कार्यिकी उपापचयी अभिक्रियाओं की अनियमितता से विविध तंत्रों की कार्यिकी जैसे कि तंत्रिका तंत्र की कार्यिकी प्रभावित

अल्प खनिज (Trace Minerals)

खनिज तत्व स्रोत महत्त्व कमी के प्रभाव
आयोडीन दूध, अंडे, समुद्री भोजन, आयोडीन युक्त नमक थाइरॉक्सिन हार्मोस का महत्वपूर्ण घटक बुद्धिहीनता, घेंघा रोग, मंद शारीरिक विकास
लौह माँस, जिगर, मछली, राजमा, अंडे, फलियाँ अनाज, हरी सब्जियाँ, सोयाबीन, पालक हीमोग्लोबिन, मायोग्लोबिन तथा साइटोक्रोम एंजाइमों का घटक, ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन की कमी से रुधिर क्षीणता, दुर्बलता, शरीर का सुरक्षा तंत्र दुर्बल
जिंक साबुत अनाज, दूध, माँस, अंडे, समुद्री भोजन सामान्य वृद्धि, जननांगों के विकास, प्रोटीन एवं न्यूक्लिक अम्लों के संश्लेषण, घावों को भरने, प्रतिरोधी का विकास अवरुद्ध वृद्धि, खुरदरी त्वचा, जनन क्षमता का क्षय, भूख की कमी, दुर्बल सुरक्षा तंत्र
तांबा माँस, मेवे, फलियाँ, हरी सब्जियाँ, समुद्री भोजन, अंडे, मछली, बीज (पोस्ता एवं सूरजमुखी) साइटोक्रोम ऑक्सीडेज एंजाइम का सहघटक, लौह उपापचय, संयोजी ऊतकों और रुधिर वाहिनियों का विकास, त्वचा में मेलानिन पिगमेंट का निर्माण रुधिर क्षीणता, संयोजी ऊतकों और रुधिर वाहिनियों की दुर्बलता, बालों का रूखा पड़ना
मैंगनीज मेवा, साबुत अनाज, हरी सब्जियाँ, चाय, फल, अनानास, बीन्स यूरिया-संश्लेषण तथा फॉस्फेट समूहों के स्थानांतरण से संबंधित अभिक्रियाओं के कुछ एंजाइमों का संघटक, घावों को भरना, अस्थियों का विकास उपास्थि, अस्थि तथा संयोजी ऊतकों की वृद्धि में अनियमितता।
कोबाल्ट दूध, पनीर, माँस, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, यकृत, ओयस्टर विटमीन B12 का महत्वपूर्ण घटक, लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण रुधिर क्षीणता (एनीमिया), मस्तिष्क संबंधित विकार
सेलेनियम (Selenium) माँस, अनाज, मछली, अंडे, समुद्री भोजन, मेवे कई एंजाइमों का सहघटक, विटामिन E का सहायक, संयोजी ऊतकों के लोच के लिए आवश्यक, थायरॉइड ग्रंथि के सुचारु रूप से कार्य करने हेतु जरूरी पेशियों की पीड़ा, हृदयपेशी-क्षय
क्रोमियम यीस्ट, समुद्री भोजन, कुछ सब्जियाँ, माँस, यकृत, मेवे, साबुत अनाज ग्लूकोज तथा अपचयी उपापचय में महत्वपूर्ण, इन्सुलिन के सामान्य कार्य हेतु जरूरी ग्लूकोज उपापचय तथा ऊर्जा उत्पादन की गड़बड़ियाँ
मॉलिब्डेनम अनाज, फलियाँ, कुछ सब्जियाँ, दूध, मेवा कुछ एंजाइमों का सहघटक एवं उन्हें सक्रिय करना नाइट्रोजनीय अपजात पदार्थों के उत्सर्जन में अनियमितता
फ्लोरीन फ्लोरीडेटेड जल (पेय जल), चाय, समुद्री भोजन (समुद्री मछली) हड्डियों तथा दाँतों की सुरक्षा दाँतों की दुर्बलता और अधिकता में फ्लोरोसिस